डेस्क । बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में भीषण तबाही मचाई है। बीते तीन दिनों से हो रही मूसलाधार और अनवरत बारिश के कारण समूचा बस्तर जलमग्न हो गया है। जगह-जगह नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे बस्तर का राज्य और देश के अन्य हिस्सों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। हालत यह है कि वर्तमान में बस्तर एक टापू के रूप में तब्दील हो चुका है।

जलमग्न हुए प्रमुख पहुंच मार्ग, रायपुर-जगदलपुर हाईवे बंद
बारिश के रौद्र रूप के कारण बस्तर को राजधानी रायपुर और अन्य पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाली तमाम प्रमुख सड़कें पानी में डूब चुकी हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्ग बंद: जगदलपुर से रायपुर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) जगह-जगह सड़कों और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।
- टापू बना बस्तर: ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले सीमावर्ती मार्ग भी जलमग्न हो चुके हैं। पुलों के ऊपर 4 से 6 फीट तक पानी का तेज बहाव देखा जा रहा है, जिससे गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
थम गए बसों के पहिये, यात्रियों में मची अफरा-तफरी
सड़क मार्ग पूरी तरह बंद होने के कारण सबसे बुरा असर आम यात्रियों पर पड़ा है:
- फंसे यात्री: जगदलपुर बस स्टैंड समेत कांकेर, कोंडागांव और सुकमा के बस टर्मिनलों पर सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं।
- परिवहन सेवाएं ठप: लंबी दूरी की अंतरराज्यीय और अंतर-जिले की सभी बस सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। बसों के पहिये थम जाने से दैनिक यात्री, मरीज, छात्र और व्यापारी बेहद परेशान हैं।
- मूलभूत सुविधाओं का संकट: सड़कों पर जगह-जगह बसें और गाड़ियां फंसी हुई हैं, जहां यात्रियों को भोजन और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।
उफान पर इंद्रावती और सबरी नदियां, निचले इलाकों में अलर्ट
क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली इंद्रावती नदी के साथ-साथ सबरी, शंखिनी और डंकिनी नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जगदलपुर शहर के निचले इलाकों और तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है।
- प्रशासन की तैयारियां: जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें (SDRF) पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
- राहत शिविर: प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है।
- चेतावनी: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे उफान मारते नदी-नालों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं और स्थिति सामान्य होने तक यात्रा करने से बचें।
तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो बस्तर में जनजीवन और अधिक प्रभावित हो सकता है।
