डेस्क । छत्तीसगढ़ में ‘महतारी वंदन योजना’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। योजना के तहत अपात्र पाए गए हितग्राहियों से राशि की वसूली शुरू किए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की है, तो वहीं डिप्टी सीएम अरुण साव ने भी कड़ा पलटवार किया है।

कांग्रेस का तंज: “चुनाव जीतने के बाद हो रहा अपमान”
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने महतारी वंदन योजना के अपात्र हितग्राहियों से वसूली किए जाने के फैसले पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महिलाओं से बड़े-बड़े वादे किए थे और सत्ता हासिल करने के लिए इस योजना का जमकर प्रचार किया था।
कांग्रेस का कहना है कि अब चुनाव जीतने के बाद सरकार माता-बहनों से पैसों की वसूली कर रही है, जो सीधे तौर पर उनका अपमान है। विपक्ष का यह भी तर्क है कि यदि आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही सही तरीके से छंटनी की जाती, तो आज महिलाओं को इस प्रकार की शर्मिंदगी और आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ता।
डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार: “कांग्रेस रच रही है ढोंग”
कांग्रेस के इन तीखे तेवरों पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कांग्रेस के बयानों को राजनीति से प्रेरित और झूठा करार दिया है।
- धोखे का आरोप: डिप्टी सीएम ने कहा कि जिस कांग्रेस पार्टी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की माता-बहनों को केवल ठगा और धोखा दिया, उसे आज महिलाओं का हितैषी बनने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
- राजनीतिक पेट दर्द: अरुण साव ने तंज कसते हुए कहा कि जब से महतारी वंदन योजना का लाभ प्रदेश की महिलाओं को मिलना शुरू हुआ है, तब से कांग्रेस नेताओं के पेट में हर रोज दर्द हो रहा है।
- महिला सशक्तिकरण का विरोध: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से महिला सशक्तिकरण और उनके कल्याणकारी कदमों का विरोध किया है, इसलिए उन्हें इस योजना पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है।
योजना और प्रशासनिक कार्रवाई पर एक नजर
महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाती है। हाल ही में जांच के दौरान कुछ ऐसे नाम सामने आए जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते थे, जिसके बाद प्रशासन द्वारा नियमों के तहत अपात्रों से राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालांकि, प्रशासनिक नियमों के तहत हो रही इस रिकवरी की कार्रवाई को राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में और अधिक गरमाने के पूरे आसार हैं।

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