बोधघाट परियोजना और खनन के खिलाफ आदिवासियों की आवाज बनेंगे राहुल गांधी

डेस्क । छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में एक बार फिर जल-जंगल-जमीन की रक्षा, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, बेधड़क खनन और प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर जनाक्रोश गहराने लगा है। स्थानीय निवासियों और आदिवासियों के अधिकारों की इस लड़ाई के बीच सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी नवंबर 2026 में बस्तर दौरे पर आ सकते हैं। हालांकि, उनके दौरे की आधिकारिक और निश्चित तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्तावित दौरे की तैयारियां तेज कर दी हैं।

​इस दौरे की जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने बताया कि पार्टी ने बस्तर के मुद्दों को लेकर एक विशेष कार्य योजना तैयार की है।

​बोधघाट परियोजना और विस्थापन का बड़ा संकट

​नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, बस्तर में विरोध का मुख्य केंद्र प्रस्तावित बोधघाट परियोजना है। इस परियोजना के जलमग्न क्षेत्र में आने के कारण लगभग 56 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

  • ​घरों का उजाड़ना: हजारों परिवार अपने पुश्तैनी घरों से बेदखल होने की कगार पर हैं।
  • ​सांस्कृतिक व सामाजिक क्षति: बड़े पैमाने पर आदिवासियों का विस्थापन हो रहा है, जिससे उनकी संस्कृति, आजीविका और जल-जंगल-जमीन के पारंपरिक अधिकार खतरे में हैं।

​इसी व्यापक जनविरोध में आदिवासियों का साथ देने और उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए राहुल गांधी को बस्तर बुलाने की रणनीति बनाई गई है।

​दौरे की पृष्ठभूमि और दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक

राहुल गांधी के दौरे की जमीन तैयार करने के लिए हाल ही में बारसूर स्थित संभावित सभा स्थल का निरीक्षण किया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की।

​मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने स्वयं राज्य के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों, खनिजों और कोयले का बेतहाशा खनन जारी है तथा लाखों पेड़ों की बलि दी जा रही है। उन्होंने बोधघाट परियोजना से उपज रहे असंतोष पर भी चर्चा की और पूछा कि इन परिस्थितियों में उनका दौरा कहां सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा।

​”खनन करने वाले उद्योगपति और व्यापारी सत्ता के साथ हैं और वे अपना काम जारी रखेंगे। लेकिन हमारी जिम्मेदारी बस्तर के आदिवासी बच्चों और उनकी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाना है।”

— राहुल गांधी (मुलाकात के दौरान व्यक्त विचार)

​बस्तर से शुरू होगी जल-जंगल-जमीन की लड़ाई

​दिल्ली में हुई चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि राहुल गांधी का दौरा बस्तर में ही होना चाहिए। कांग्रेस रणनीति के तहत सबसे पहली बड़ी राजनीतिक और जन-आंदोलन की लड़ाई बोधघाट परियोजना और आदिवासियों के विस्थापन के मुद्दे पर लड़ेगी।

राहुल गांधी ने बस्तर आने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। नवंबर महीने में किसी भी दिन उनके आगमन की तारीख तय हो सकती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस दौरे से न केवल बस्तर के आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को बल मिलेगा, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और विस्थापन के खिलाफ एक मजबूत जन-आंदोलन खड़ा करने में भी मदद मिलेगी।

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