सहारनपुर की नक्काशी से लेकर मिर्जापुर के कार्पेट तक: स्वदेशी मेले में महक उठा लालबाग मैदान

जगदलपुर । ऐतिहासिक लालबाग मैदान में इन दिनों स्वदेशी मेले की रौनक देखते ही बन रही है। यह आयोजन न केवल शहरवासियों के लिए खरीदारी और मनोरंजन का मुख्य केंद्र बना हुआ है, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूती दे रहा है। आइए जानते हैं इस भव्य मेले की खासियतों के बारे में।

​मेले के मुख्य आकर्षण

  • ​विशाल विविधता: मेले में कुल 223 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वदेशी उत्पादों की अदभुत छटा देखने को मिल रही है।
  • ​सहारनपुर की नक्काशी: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए लकड़ी के आकर्षक उत्पाद और उन पर की गई बारीक कारीगरी लोगों का मन मोह रही है।
  • ​मिर्जापुर के कार्पेट: अपनी बेहतरीन बुनाई, सुंदर डिजाइन और मनमोहक रंगों के कारण मिर्जापुर की प्रसिद्ध दरें व कार्पेट विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
  • ​खान-पान और जायके: गुजरात की प्रसिद्ध नमकीन और मुखवास के साथ-साथ देश के विभिन्न कोनों से आए पारंपरिक खाद्य उत्पाद खाने-पीने के शौकीनों को खूब भा रहे हैं।
  • ​पारंपरिक हस्तशिल्प: घरेलू सजावट की वस्तुएं, हस्तनिर्मित सामान, रंग-बिरंगे वस्त्र और झूले मेले के उत्साह को और अधिक बढ़ा रहे हैं।

​स्थानीय अर्थव्यवस्था और कारीगरों को प्रोत्साहन

यह मेला केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए छोटे उद्यमियों, शिल्पकारों और पारंपरिक कारीगरों के लिए एक बेहतरीन मंच साबित हो रहा है। एक ही छत के नीचे देश की कला, संस्कृति और हुनर से रूबरू होने का अवसर मिलने से स्थानीय नागरिकों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है।

विशेष संदेश: यह आयोजन जगदलपुर में एक उत्साहपूर्ण माहौल पैदा करने के साथ-साथ हमारी प्राचीन शिल्पकला और स्वदेशी वस्तुओं को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है।

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