​बचपन के शौक को बनाया पहचान: महादेव घाट के इन दो भाइयों की मूर्तिकला का सोशल मीडिया पर जलवा

डेस्क । छत्तीसगढ़ की माटी ने कलाकारों को हमेशा से अनूठा सृजन कौशल दिया है, लेकिन जब बात मूर्ति कला की आती है, तो राजधानी रायपुर के दो सगे भाइयों—लक्ष्मी नारायण चक्रधारी और परमेश्वर चक्रधारी—ने अपनी कला के दम पर पूरे देश में एक नई मिसाल कायम की है। महादेव घाट के पास अपने कला केंद्र से कला साधना कर रहे इन दोनों भाइयों की बनाई मां दुर्गा की एक भव्य प्रतिमा इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है, जिसकी खूबसूरती और बारीकी की तारीफ देश के कोने-कोने से लोग कर रहे हैं।

​बचपन का शौक बना जिंदगी का मुकाम

​हर सफल कहानी के पीछे एक जुनून होता है, और चक्रधारी बंधुओं की कहानी भी इसी जुनून की मिसाल है। बचपन में कला के प्रति उनका गहरा लगाव था। मिट्टी से खेलना, आकार देना और अपनी कल्पनाओं को मूर्त रूप देना उन्हें सबसे ज्यादा भाता था।

​समय के साथ इस बचपन के शौक को महज एक मनोरंजन तक सीमित न रखकर, इन दोनों भाइयों ने इसे अपना करियर और पहचान बनाने की ठानी। अपनी कला को पेशेवर और परिष्कृत रूप देने के लिए उन्होंने मूर्तिकला में BFA (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। इस उच्च शिक्षा ने उनके अंदर छिपी नैसर्गिक प्रतिभा को आधुनिक तकनीकों और बारीकियों के साथ तराशने का काम किया, जिससे उनके हुनर को एक नया और शानदार मुकाम मिला।

​महादेव घाट से देश के दूसरे राज्यों तक फैला कला का दायरा

रायपुर के प्रसिद्ध महादेव घाट के समीप स्थित इन दोनों भाइयों का कला केंद्र आज किसी किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। यहां तैयार होने वाली मूर्तियां सिर्फ छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी भव्यता, जीवंतता और कलात्मक उत्कृष्टता के बल पर इनकी कलाकृतियां दूसरे राज्यों तक भी पहुंच रही हैं।

​चाहे मां दुर्गा की प्रतिमाओं का सृजन हो या अन्य देवी-देवताओं के विग्रह, इनके द्वारा गढ़ी गई हर एक मूर्ति में कला का ऐसा जीवंत रूप झलकता है जो देखने वालों का मन मोह लेता है। आकृतियों के चेहरे के भाव, वस्त्रों की सजावट और रंगों का संयोजन इतना सटीक होता है कि प्रतिमाएं मानो सजीव प्रतीत होती हैं।

​सोशल मीडिया पर वायरल हुई भव्य प्रतिमा

​हाल ही में इन दोनों भाइयों द्वारा तैयार की गई मां दुर्गा की एक भव्य प्रतिमा इंटरनेट और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस कलाकृति की भव्यता और नक्काशी की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है। लोग उनकी इस मेहनत और कला के प्रति समर्पण की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

​छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणास्रोत

​लक्ष्मी नारायण और परमेश्वर चक्रधारी आज केवल दो मूर्तिकार नहीं हैं, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर अपने सपनों के प्रति ईमानदारी हो और हुनर को सही दिशा मिल जाए, तो कोई भी स्थानीय कलाकार अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय फलक पर अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।

​अपनी तूलिका और छैनी-हथौड़े से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला का डंका पूरे देश में बजाने वाले चक्रधारी बंधुओं की यह सफलता राज्य के हर वासी के लिए गर्व का विषय है।

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