डेस्क । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के आबकारी विभाग के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और एडिशनल कमिश्नर पी.एल. साहू को अवमानना याचिका पर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक आबकारी आरक्षक (Excise Constable) की सर्विस बुक से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता आरक्षक के सेवा अभिलेख (Service Record) में दर्ज एक प्रतिकूल टिप्पणी (Adverse Remark) को हटाने और उसमें आवश्यक सुधार करने के संबंध में हाई कोर्ट ने पूर्व में एक स्पष्ट आदेश जारी किया था।
अदालत के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद, तय समय सीमा के भीतर आबकारी विभाग द्वारा इस आदेश का पालन नहीं किया गया। कोर्ट के आदेश की अनदेखी किए जाने पर व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की।
हाई कोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और एडिशनल कमिश्नर पी.एल. साहू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अब 4 सप्ताह के भीतर कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि अदालत के आदेश का समय पर पालन क्यों नहीं किया गया और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
न्यायालय द्वारा विभाग के दो सबसे उच्च अधिकारियों को एक साथ अवमानना नोटिस जारी किए जाने से प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों और न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन में होने वाली प्रशासनिक देरी को अदालतें बर्दाश्त नहीं करेंगी।
