बस्तर ओलंपिक 2026: खेल और उत्साह का महाकुंभ, अब तक 2 लाख 92 हजार से अधिक पंजीयन

डेस्क । छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में खेलों के प्रति उत्साह हर साल नए रिकॉर्ड बना रहा है। बात जब बस्तर ओलंपिक की हो, तो यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर की युवा ऊर्जा, उनकी प्रतिभा और बदलाव की एक मजबूत बानगी बन चुका है। बस्तर ओलंपिक 2026 को लेकर तैयारियां बेहद तेज हो चुकी हैं और इस बार खेल प्रेमियों में ऐसा जोश देखने को मिल रहा है कि यह आयोजन इतिहास रचने की ओर अग्रसर है।

​रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी की ओर कदम

​खेल विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बस्तर ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए अब तक 2 लाख 92 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन करवा लिया है। खास बात यह है कि इस महाकुंभ में संभाग के सातों जिलों के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

  • ​पंजीयन की अंतिम तिथि: खिलाड़ियों के पास अपना नाम दर्ज कराने के लिए 30 अक्टूबर तक का समय है।
  • ​पिछले वर्षों से तुलना:
    • ​साल 2024: 1 लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था।
    • ​साल 2025: 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
    • ​साल 2026 (अब तक): शुरुआती आंकड़ों और अंतिम तिथि नजदीक होने के साथ इस बार भी आंकड़ा पिछले वर्ष के करीब या उसे पार करने की उम्मीद है।

​इस बार की मुख्य विशेषताएं

  • ​आत्मसमर्पित माओवादियों की सहभागिता: इस वर्ष का बस्तर ओलंपिक कई मायनों में बेहद खास है। मुख्यधारा में लौटे 500 आत्मसमर्पित माओवादी भी इस खेल महाकुंभ में हिस्सा लेकर एक नई शुरुआत कर रहे हैं, जो खेल के मैदान के जरिए सामाजिक एकता और विश्वास का एक अनूठा संदेश देता है।
  • ​बदला हुआ शेड्यूल: आगामी राज्योत्सव और दीपावली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए खेल विभाग ने समय-सारणी में आंशिक संशोधन किया है। अब ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं 4 से 6 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी।

​आगामी चरणों का सफर

​ब्लॉक स्तर पर रोमांचक मुकाबले संपन्न होने के बाद प्रतियोगिता का अगला पड़ाव शुरू होगा:

  1. ​ब्लॉक स्तर: 4 से 6 नवंबर 2026
  2. ​जिला स्तर: ब्लॉक स्तर के बाद विजेता खिलाड़ी जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।
  3. ​संभाग स्तर: जिला स्तर के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिड़ेंगे।

​बस्तर की नई पहचान: बंदूक की जगह थामे खेलकूद

कभी असामाजिक गतिविधियों और पिछड़ेपन के साए में देखे जाने वाले बस्तर की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण और शहरी अंचलों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को निखारने का एक सशक्त मंच बन चुके हैं। तीरंदाजी से लेकर एथलेटिक्स और अन्य पारंपरिक खेलों तक, यहां के युवाओं का जोश यह साबित करता है कि वे खेल के मैदान में अपनी एक अलग चमक बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

​राज्य शासन और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से आयोजित यह महाकुंभ न सिर्फ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि बस्तर के युवाओं को एक नई दिशा और उम्मीद भी प्रदान कर रहा है।

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