डेस्क । भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का बस्तर दौरा क्षेत्रीय संस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रीय विकास के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने इस प्रवास के दौरान वे जगदलपुर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की मुख्य रस्म ‘मुरिया दरबार’ में शामिल होंगी तथा ऐतिहासिक लाल बाग मैदान में एक विशाल आमसभा को संबोधित करेंगी।
राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास का महत्व
- जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान: बस्तर का दशहरा दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला अनोखा उत्सव है, जो पारंपरिक भाईचारे और लोक संस्कृति का प्रतीक है। राष्ट्रपति का इस उत्सव के केंद्र यानी ‘मुरिया दरबार’ में शामिल होना देश के सर्वोच्च पद से आदिवासी संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं को मिलने वाला सबसे बड़ा सम्मान है।
- विश्वास और विकास का संदेश: बस्तर कभी नक्सल प्रभावित और अशांत क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। राष्ट्रपति के बार-बार बस्तर दौरे इस बात का प्रमाण हैं कि क्षेत्र में अब शांति, सुरक्षा और विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। इससे स्थानीय नागरिकों, युवाओं और मुख्यधारा से जुड़े लोगों का आत्मबल बढ़ता है।
- कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जुड़ाव: एक आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली देश की राष्ट्रपति का बस्तर आना यहां के निवासियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। यह दौरा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाओं (जैसे ‘नियद नेल्लानार योजना’ और बुनियादी ढांचे के विकास) को नई गति प्रदान करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर दौरा: अब तक कितनी बार?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले भी बस्तर आ चुकी हैं।

- इसी वर्ष फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर आकर ‘बस्तर पंडुम 2026’ का भव्य उद्घाटन किया था और लाल बाग मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया था।
- वर्तमान अक्टूबर 2026 का यह दौरा बस्तर क्षेत्र में उनका दूसरा प्रमुख दौरा है। इस प्रकार वे राष्ट्रपति के रूप में दो बार बस्तर की पावन भूमि पर आ चुकी हैं।
बस्तर आने वाले अन्य राष्ट्रपति: इतिहास और विवरण
आजादी के बाद से देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे विभूतियों ने समय-समय पर बस्तर की यात्रा की है। बस्तर आने वाले राष्ट्रपतियों का संक्षिप्त इतिहास इस प्रकार है:
- डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (जून 2004):
- देश के तत्कालीन और लोकप्रिय राष्ट्रपति ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम 3 जून 2004 को बस्तर के प्रवास पर आए थे।
- उनका यह दौरा ऐतिहासिक था, क्योंकि वे बस्तर के आंतरिक ग्राम रानसर्गीपाल पहुंचे थे। उनके आने से उस गांव में पहली बार बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंची थीं। आज भी बस्तर के उस गांव के लोग और युवा उन्हें अपना रोल मॉडल मानते हैं तथा उस इलाके को प्यार से ‘राष्ट्रपति पारा’ कहा जाता है।
- श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (वर्ष 2026):
- वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने कार्यकाल के दौरान बस्तर की संस्कृति और विकास को करीब से देखने के लिए दो बार (फरवरी 2026 और अक्टूबर 2026) बस्तर का दौरा किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर आगमन सिर्फ एक प्रशासनिक दौरा भर नहीं है, बल्कि यह देश के शीर्ष नेतृत्व और बस्तर की आदिवासी संस्कृति के बीच के आत्मीय संबंधों का प्रतीक है। ‘मुरिया दरबार’ जैसी प्राचीन लोकतांत्रिक परंपरा में सहभागिता और लाल बाग मैदान से संवाद बस्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा के विकास के साथ और अधिक मजबूती से जोड़ता है।