जगदलपुर । विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपने अनूठे आयोजनों और परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस ऐतिहासिक पर्व का मुख्य आकर्षण 8 पहियों और 4 पहियों वाले विशालकाय रथों की परिक्रमा होती है, जिसे खींचने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण पहुंचते हैं। लेकिन हाल ही में जगदलपुर में रथ परिक्रमा के दौरान एक ऐसी अप्रिय घटना घटी, जिसने बस्तर की शांतिपूर्ण परंपरा पर सवालिया निशान लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रथ परिक्रमा के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब रथ खींचने पहुंचे ग्रामीणों को नियंत्रित करने और संभाल रहे पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह मामूली सी बहस हाथापाई और मारपीट में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच नोंकझ झोंक इतनी बढ़ गई कि माहौल बिगड़ गया। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होता देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल को तुरंत रवाना किया गया, जिसके बाद किसी तरह मामले को शांत कराया गया।
ग्रामीणों का विरोध और प्रशासन का कदम
इस अप्रिय घटना और पुलिस के साथ हुई झड़प से आहत होकर ग्रामीणों ने रथ खींचने से साफ इनकार कर दिया। रथ परिक्रमा रुक जाने और लगातार हो रही देर और पहिया टूट जाने को देखते हुए जिला प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा।
- परंपरा पर असर: बस्तर दशहरे की परंपरा में रथ खींचने का कार्य पूरी तरह से स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों द्वारा पूरी आस्था के साथ किया जाता है। ग्रामीणों के पीछे हटने से एक अजीब सी स्थिति बन गई।
- जेसीबी का सहारा: समय पर रस्म पूरी करने की मजबूरी को देखते हुए प्रशासन ने अंततः जेसीबी मशीन की मदद से रथ को खींचवाया।
परंपरा और प्रशासन के बीच संतुलन की जरूरत
बस्तर दशहरा केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह यहां के आदिवासियों की अटूट आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। रथ परिक्रमा इस पर्व का प्राण मानी जाती है।
इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इतने विशाल मेलों और आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच संवाद और संयम बरता जाता, तो इस तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता था।
प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच आपसी सहयोग से ही इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को उसकी मूल भव्यता के साथ सहेजा जा सकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस घटना पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि भीड़ प्रबंधन के तरीकों में कुछ बदलाव की आवश्यकता है?