जगदलपुर । बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य जितना मनमोहक है, यहाँ का मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां कई बार उतनी ही चुनौतीपूर्ण बन जाती हैं। कुछ दिनों पहले जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में हुई भीषण बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था। इस आपदा ने कई हंसते-खेलते परिवारों की दुनिया कुछ ही घंटों में उजाड़ दी।

बाढ़ का कहर: बेबस हो गए थे गरीब परिवार
जलप्रलय के इस तांडव में सैकड़ों परिवारों के आशियाने ढह गए। जिनकी जिंदगीभर की जमा-पूंजी थी, वह पानी में बह गई। खेतों में लहलहाती फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों और मेहनतकश परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।
इस आपदा से सबसे ज्यादा मार उन गरीब परिवारों पर पड़ी, जिनके पास न तो पर्याप्त आर्थिक संसाधन थे और न ही इस बड़े नुकसान से उबरने का कोई सहारा। ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया सामने आया कुरुषपाल गाँव से, जहाँ बाढ़ ने केसावती नामक महिला और उनके तीन मासूम बच्चों का आशियाना पूरी तरह छीन लिया। सिर पर छत का कोई ठिकाना न होने के कारण केसावती की बेबसी साफ झलक रही थी, जो अपने बच्चों के साथ इस आपदा के बाद पूरी तरह असहाय हो चुकी थीं।

’बस्तरिया बैक बेंचर्स’ बने फरिश्ता
मुश्किल की इस घड़ी में जब अपनों के चेहरे भी फीके पड़ने लगते हैं, तब कुछ लोग उम्मीद बनकर सामने आते हैं। बस्तर के युवाओं की प्रेरणादायक टीम ‘बस्तरिया बैक बेंचर्स’ ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जिसने समाज के सामने करुणा और सेवा का बेहतरीन उदाहरण रखा है।
इस युवा टीम ने आपदा का दर्द करीब से महसूस किया और हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय खुद मदद के लिए आगे आए। टीम ने जगदलपुर के समीप स्थित बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित कुरुषपाल गाँव को गोद लेकर वहाँ के सबसे जरूरतमंद परिवारों की सुधि ली।

नए आशियाने में गूँजी खुशी की किलकारियाँ
’बस्तरिया बैक बेंचर्स’ के युवाओं ने अपने खुद के संसाधनों और आपसी सहयोग से कुरुषपाल गाँव में दो अत्यंत जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रोफाइल शीट (Profile Sheet) से सुसज्जित एक-एक कमरे के पक्के मकान का निर्माण कराया।
- सुरक्षित छत: जिन परिवारों के पास सिर छिपाने के लिए एक इंच जमीन या छत नहीं बची थी, उन्हें अब आगामी ठंड और बारिश से बचने के लिए एक सुरक्षित आशियाना मिल गया है।
- गृह प्रवेश: शनिवार का दिन उन परिवारों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था। हर्षोल्लास के माहौल में दोनों परिवारों ने फीता काटकर अपने नए और सुरक्षित आशियाने में प्रवेश किया।
समाज के लिए एक प्रेरणा
कुरुषपाल गाँव की केसावती और उनके बच्चों सहित दोनों परिवारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान यह बयाँ कर रही थी कि सच्ची मदद किसे कहते हैं। ‘बस्तरिया बैक बेंचर्स’ के इन युवाओं ने साबित कर दिया कि यदि दिल में सेवा का जज्बा हो, तो उम्र या संसाधन मायने नहीं रखते।
यह पहल न केवल बाढ़ पीड़ितों के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि उन तमाम युवाओं और संगठनों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि संकट के समय समाज को सँभालने की जिम्मेदारी हम सबकी है। बस्तर की यह युवा टीम आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई इनके इस सेवा भाव को सलाम कर रहा है।
