शक्ति, भक्ति और आस्था का महापर्व: नवरात्रि और बस्तर की अनूठी परंपरा

बस्तर । नवरात्रि का पावन पर्व आते ही पूरा देश माँ दुर्गा की भक्ति में सराबोर हो जाता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत, नारी शक्ति के सम्मान और आंतरिक शुद्धि का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन किसकी पूजा होती है, यह पर्व क्यों मनाया जाता है, इसमें क्या खास होता है, और विशेष रूप से बस्तर में यह पर्व क्यों इतना अलौकिक और खास माना जाता है।

​1. नवरात्रि के पहले दिन माता के किस स्वरूप की पूजा होती है?

​नवरात्रि के पहले दिन को प्रतिपदा कहा जाता है, और इस दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें ‘शैलपुत्री’ कहा जाता है। वृषभ (नंदी) पर सवार और दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल धारण करने वाली माँ शैलपुत्री स्थिरता, धैर्य, और शक्ति का प्रतीक हैं। घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ ही इन्हीं की आराधना से नौ दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ होता है।

​2. क्यों मनाई जाती है नवरात्रि?

​नवरात्रि मनाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी पौराणिक कथाएँ और धार्मिक मान्यताएँ हैं:

  • ​महिषासुर मर्दन: पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। तब सभी देवताओं के तेज से प्रकट होकर आदि शक्ति माँ दुर्गा ने लगातार नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध कर ब्रह्मांड को उसके आतंक से मुक्त कराया।
  • ​श्रीराम की उपासना: त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले समुद्र तट पर नौ दिनों तक माँ शक्ति की आराधना की थी, जिसके बाद उन्हें विजय श्री प्राप्त हुई थी।
  • ​ऋतु परिवर्तन: आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ, नवरात्रि का यह समय दो ऋतुओं (विशेषकर शरद ऋतु की शुरुआत) के संधिकाल में आता है, जब मौसम और शरीर के भीतर बदलाव होते हैं। नौ दिनों का उपवास और पूजा हमारे तन और मन को ऊर्जावान तथा संतुलित बनाने में मदद करती है।

​3. नवरात्रि में क्या कुछ खास होता है?

​नवरात्रि का हर एक दिन अपने आप में उत्सव है, लेकिन कुछ बातें इसे बेहद खास बनाती हैं:

  • ​घटस्थापना (कलश स्थापना): पहले दिन मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और कलश स्थापित किया जाता है, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
  • ​अखंड ज्योति और व्रत: कई घरों और मंदिरों में नौ दिनों तक अखंड जोत जलाई जाती है। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार नौ दिन या पहले-आठवें दिन का उपवास रखते हैं।
  • ​कन्या पूजन (कंजिका): अष्टमी और नवमी तिथि पर छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
  • ​डांडिया और गरबा: विशेषकर उत्तर और पश्चिमी भारत में रात के समय रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में गरबा और डांडिया का आयोजन होता है, जो सामाजिक उल्लास को बढ़ाता है।

​4. बस्तर में क्यों और ज्यादा खास हो जाती है नवरात्रि?

​जब बात बस्तर (छत्तीसगढ़) की आती है, तो नवरात्रि का यह पर्व किसी साधारण त्योहार से कहीं आगे निकलकर एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और अलौकिक महाकुंभ का रूप ले लेता है। यहाँ की नवरात्रि पूरे देश में ‘विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा’ के रूप में जानी जाती है।

​बस्तर की नवरात्रि इसलिए खास है क्योंकि:

  • ​अन्याय और अनोखा स्वरूप: यहाँ की नवरात्रि सिर्फ नौ दिनों की नहीं होती, बल्कि यह दुनिया का सबसे लंबा 75 दिनों तक चलने वाला दशहरा पर्व है, जिसकी शुरुआत पारंपरिक रूप से हरेली या श्रावण मास से हो जाती है।
  • ​माता दंतेश्वरी की आराधना: बस्तर की आराध्य देवी माता दंतेश्वरी इस पूरे उत्सव के केंद्र में होती हैं। यहाँ की मुख्य रस्में किसी सामान्य मूर्ति विसर्जन या रावण दहन जैसी नहीं होतीं, बल्कि यहाँ की परंपराएं प्रकृति, आदिवासी संस्कृति और राजा रामचन्द्र शाह के समय की ऐतिहासिक रियासती विरासत से जुड़ी हैं।
  • ​रथ यात्रा (माईजी की रथ परिक्रमा): बस्तर दशहरा का सबसे प्रमुख आकर्षण विशालकाय लकड़ी का दो मंजिला रथ है, जिसे बिना पहियों के रस्सियों से खींचा जाता है। इस रथ पर देवी दंतेश्वरी की छत्र-छाया और फूल-कँवर (देवी के प्रतीक) सवार होते हैं। इस रथ को खींचने के लिए आसपास के ग्रामीण और हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
  • ​प्रकृति और जनजातीय समन्वय: यहाँ मुरिया, माड़िया और बत्रा जैसी जनजातियों के पारंपरिक नृत्य, जोगी उठाई की रस्म, काछन गादी (जहाँ देवी एक छोटी बच्ची के माध्यम से भविष्य की भविष्यवाणी करती हैं) और मुरिया दरबार जैसे अनूठे अनुष्ठान होते हैं, जो देश के किसी अन्य कोने में देखने को नहीं मिलते।

बस्तर में नवरात्रि केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि यहाँ की माटी का अपनी संस्कृति, इतिहास और देवी के प्रति अगाध प्रेम का जीवंत दस्तावेज है।

Share :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *