डेस्क । डूब प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर उफान पर है। अपनी जमीन और न्यायसंगत अधिकारों की मांग को लेकर ग्रामीणों का जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी है। इस आंदोलन के दौरान 9 प्रदर्शनकारियों की अचानक तबीयत बिगड़ने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

तीन दिनों से पानी में डटे हैं ग्रामीण
गंगरेल बांध के डूब क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण 12 अक्टूबर से पानी के बीच खड़े होकर अनोखा और कड़ा विरोध प्रदर्शन (जल सत्याग्रह) कर रहे हैं। ठंड और पानी में लगातार रहने के कारण आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने लगा है।
- स्वास्थ्य बिगड़ने की घटना: प्रदर्शन के दौरान अचानक 9 ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई।
- अस्पताल में भर्ती: सभी प्रभावितों को तुरंत इलाज के लिए धमतरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- राहत की खबर: चिकित्सकों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर है।
क्या है पूरा मामला और ग्रामीणों की मांगें?
ग्रामीणों का आरोप है कि गंगरेल बांध के निर्माण के समय कुल 52 गांव डूब क्षेत्र की चपेट में आ गए थे। उस समय शासन-प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक जमीन देने का वादा किया गया था।
- हाईकोर्ट का आदेश: ग्रामीणों का दावा है कि इस पूरे मामले में उच्च न्यायालय (High Court) का निर्णय भी उनके पक्ष में आया है, फिर भी उन्हें अब तक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है।
- अधिकारों की लड़ाई: दशकों बीत जाने के बाद भी वादे पूरे न होने के कारण ग्रामीणों में गहरा रोष है। उनका साफ कहना है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का कानूनी और वास्तविक अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह जल सत्याग्रह अनवरत जारी रहेगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की राह
नौं आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद इस आंदोलन को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन पर अब दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करे।
आगे की स्थिति: अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और प्रशासन इन पीड़ित ग्रामीणों की मांगों पर कब तक कोई ठोस, सकारात्मक और व्यावहारिक पहल करता है, ताकि आंदोलनकारियों का जीवन जोखिम में न पड़े और उन्हें उनका हक मिल सके।