इंद्रावती जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ में गरमाई सियासत: कांग्रेस ने सरकार को घेरा, भाजपा सांसद का पलटवार

जगदलपुर । बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ का संकट भले ही धीरे-धीरे टल रहा हो, लेकिन इस पर शुरू हुई राजनीतिक जुबानी जंग तेज हो गई है। नदी के जल बंटवारे और बाढ़ के हालातों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज और बस्तर से भाजपा सांसद महेश कश्यप के बीच तीखे वार-पलटवार देखने को मिल रहे हैं।

​डबल इंजन सरकार इंद्रावती जल बंटवारे में विफल: दीपक बैज

​कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने बस्तर में आई बाढ़ और इंद्रावती नदी के बिगड़े हालातों के लिए राज्य और केंद्र की सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि:

  • ​जल बंटवारे में विफलता: महानदी के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार ने ओडिशा के साथ सहमति बना ली, लेकिन इंद्रावती नदी के न्यायसंगत जल बंटवारे को लेकर ‘डबल इंजन’ की सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
  • ​गर्मी में सूखा, बारिश में बाढ़: ओडिशा सरकार भीषण गर्मी के दौरान इंद्रावती नदी का पानी रोक लेती है, जिससे बस्तर में जल संकट पैदा हो जाता है। वहीं, बारिश के मौसम में ओडिशा अचानक पानी छोड़ देता है, जिससे बस्तर को हर साल भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ता है।

​दीपक बैज आपदा में अवसर ढूंढ रहे हैं: महेश कश्यप

​कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों का तुरंत जवाब देते हुए बस्तर के भाजपा सांसद महेश कश्यप ने पलटवार किया। उन्होंने दीपक बैज पर संकट के समय राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा:

  • ​रायपुर में बैठकर बयानबाजी: दीपक बैज धरातल से दूर रायपुर में बैठकर केवल सियासी बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और पूरा प्रशासनिक अमला राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।
  • ​जनहानि से बचाव और मुआवजा: प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की सतर्कता के कारण ही बस्तर में किसी भी तरह की बड़ी जनहानि नहीं हुई। बाढ़ के कारण हुए धनहानि और संपत्ति के नुकसान का आकलन किया जा रहा है, और सरकार सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा राशि प्रदान करेगी।

​बस्तर के निवासियों के लिए इंद्रावती नदी जीवनदायिनी होने के साथ-साथ हर साल मौसमी संकट की वजह बनती रही है। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों राज्यों के बीच इस नदी के जल बंटवारे को लेकर कोई स्थायी समाधान निकल पाता है या यह मुद्दा केवल बयानों और राजनीतिक बहस तक ही सीमित रहेगा।

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