​तबाही के निशान बाकी, राहत की आस में कलेक्ट्रेट पहुंच रहे बस्तर के बाढ़ पीड़ित किसान

​जगदलपुर (बस्तर): बस्तर अंचल में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इंद्रावती नदी के उफान से तटीय गांवों में हुई तबाही के निशान अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। कहीं लहलहाती धान की फसल पूरी तरह बह गई है, तो कहीं उपजाऊ खेतों में रेत और गाद जम जाने से अगली खेती करना भी मुश्किल हो गया है। इस गंभीर आर्थिक संकट के बीच प्रभावित किसान प्रतिदिन अपनी मांगों को लेकर जगदलपुर कलेक्ट्रेट का चक्कर काटने को मजबूर हैं।

​भारतीय किसान संघ ने उठाई मांग: 65,100 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की दरकार

​भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष नील कुमार बघेल ने बताया कि नदी तट से लगे डोंगाघाट, छेपड़ागुड़ा, मकावांड, गुड़ापुड़ा, तारापुर और बजावांड जैसे क्षेत्रों में खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। किसान संघ ने शासन-प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • ​फसल क्षति का मुआवजा: समर्थन मूल्य (21 क्विंटल प्रति एकड़) के आधार पर प्रति एकड़ 65,100 रुपये की सहायता राशि दी जाए।
  • ​ऋण माफी: किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा अन्य कृषि ऋणों को तत्काल पूर्णतः माफ किया जाए।
  • ​क्षतिग्रस्त मकान व उपकरण: ध्वस्त हुए मकानों का पर्याप्त मुआवजा देने के साथ-साथ बाढ़ में बहे कृषि उपकरणों के नुकसान की भरपाई की जाए।
  • ​फसल बीमा की त्वरित राशि: फसल बीमा की क्लेम राशि का भुगतान 7 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

​प्रशासन का रुख: 25 करोड़ रुपये जारी, सर्वे अंतिम चरण में

​दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रभावितों को राहत पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है:

  • ​मकान क्षति: अब तक क्षतिग्रस्त मकानों के मुआवजे हेतु 25 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।
  • ​फसल नुकसान सर्वे: पटवारी और कृषि विभाग द्वारा फसल नुकसान का सर्वे कार्य अंतिम चरण में है।
  • ​भुगतान की समय-सीमा: कई तहसीलों के प्रकरण तैयार कर ट्रेजरी में भेज दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि अगले 1 से 2 सप्ताह में किसानों के खातों में मुआवजा राशि पहुंच जाएगी।

​राहत और अगली फसल की चिंता

सरकारी दावों के बीच किसानों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर राहत राशि कब तक उनके हाथों में पहुंचेगी। फसल गंवा चुके किसानों के सामने जीवन-यापन के साथ-साथ अगली फसल की तैयारी के लिए बीज और खाद जुटाने का बड़ा संकट खड़ा है। अब देखना होगा कि शासन का राहत तंत्र किसानों तक कितनी जल्दी आर्थिक मदद पहुंचा पाता है।

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