डेस्क । एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मामला सामने आया है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जहां बेड की भारी कमी के कारण एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज करने की मजबूरी बनी हुई है संतापजनक बात यह है कि इस अव्यवस्था से गर्भवती महिलाओं को भी राहत नहीं मिल पा रही है और उन्हें भी अन्य मरीजों व बच्चों के साथ एक ही बेड साझा करना पड़ रहा है।
मरीजों और परिजनों की बढ़ीं मुश्किलें
मेकाहारा अस्पताल पूरे प्रदेश के मरीजों के लिए इलाज का सबसे बड़ा केंद्र है। रोजाना दूर-दराज के जिलों से सैकड़ों मरीज उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं। हालांकि, वार्डों में फैली इस अव्यवस्था से न केवल मरीजों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है, बल्कि प्रसूताओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक बेड पर दो मरीजों को रखने से इलाज के दौरान परिजनों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान: “क्षमता से अधिक लोड, जल्द सुधरेगी व्यवस्था”
अस्पताल की इस बदहाली और बेड की किल्लत पर सवाल पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति को स्वीकार करते हुए बयान दिया है। उन्होंने कहा:
“अस्पताल में मरीजों की संख्या इसकी स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक है, जिसके कारण व्यवस्था पर पूरा लोड आ जाता है। बेड की कमी की समस्या हमारे संज्ञान में है और इसे जल्द से जल्द ठीक कर लिया जाएगा। हम सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रहे हैं।”
सुधार की दरकार
यद्यपि प्रशासन की ओर से जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या और सीमित संसाधनों के बीच आम जनता को तत्काल राहत की दरकार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर के मेकाहारा पर से दबाव कम करने के लिए क्षेत्रीय व जिला अस्पतालों की व्यवस्था सुदृढ़ करना बेहद जरूरी है, ताकि राजधानी के इस एकमात्र बड़े केंद्र पर क्षमता से अधिक बोझ न पड़े।
