डेस्क । पशु क्रूरता के एक मामले को लेकर मेयर पूजा विधानी और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं (एनिमल लवर्स) के बीच छिड़ा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। ईंट भट्ठों और अन्य बाहरी क्षेत्रों में खच्चरों पर हो रहे अत्याचार से जुड़े इस मामले में मेयर पर अपने पद का रौब दिखाकर कार्यकर्ताओं को धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत ईंट भट्ठों में काम करने वाले खच्चरों के साथ हो रही अमानवीय क्रूरता से हुई। एनिमल वेलफेयर एनजीओ से जुड़े कार्यकर्ताओं को खच्चरों के साथ मारपीट और उनसे क्षमता से अधिक काम कराने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद पशु क्रूरता से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें बेज़ुबान जानवरों की बदहाल स्थिति साफ़ देखी जा सकती थी।
वीडियो और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए एनिमल लवर्स की टीम ने त्वरित कार्रवाई की और पीड़ित खच्चरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित शेल्टर होम (Shelter Home) में शिफ्ट कर दिया, ताकि उनका इलाज और देखभाल की जा सके।
मेयर पर दबाव बनाने का आरोप
आरोप है कि खच्चरों को शेल्टर में शिफ्ट किए जाने के बाद मेयर पूजा विधानी ने एनजीओ कार्यकर्ताओं पर खच्चरों को तुरंत छोड़ने के लिए अनुचित दबाव बनाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का दावा है कि जब उन्होंने नियमों का हवाला देकर जानवरों को बिना सुचारू व्यवस्था के छोड़ने से इनकार किया, तो मेयर ने अपने संवैधानिक पद की धौंस दिखाते हुए उन्हें परिणाम भुगतने की धमकी दी।

कथित ऑडियो से गर्माया मामला
विवाद तब और गहरा गया जब मेयर और एनिमल एक्टिविस्ट के बीच हुई बातचीत का एक कथित ऑडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। इस ऑडियो में कथित तौर पर मेयर का रवैया काफी आक्रामक बताया जा रहा है। हालाँकि, इस वायरल ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इसने पशु प्रेमियों और आम जनता के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
सवाल और अगली राह
पशु अधिकारों के लिए काम कर रहे एनजीओ का कहना है कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और बेज़ुबान जानवरों के न्याय के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे। दूसरी ओर, इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या विकास या व्यापारिक हितों के नाम पर बेज़ुबान जीवों के साथ क्रूरता को अनदेखा किया जा सकता है?
फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक और पर्यावरण संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।