डेस्क । छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में सामने आए कथित मिलावटी शराब और अवैध पैकेजिंग के बहुचर्चित प्रकरण ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले को लेकर छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेंद्र भवानी ने तीखा बयान जारी करते हुए प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। युवा मंच ने आबकारी व्यवस्था संभालने वाली BIS कंपनी, इसके रीजनल ऑफिसर अरुण उपाध्याय और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई और बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप
संगठन का मुख्य आरोप है कि इस अवैध शराब सिंडिकेट के खुलासे के बाद केवल मैदानी स्तर के छोटे कर्मचारियों और कर्मियों पर गाज गिराकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
- सुपरविजन पर सवाल: शराब दुकानों के संचालन, स्टॉक की निगरानी और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी BIS कंपनी और उसके उच्च अधिकारियों की होती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अवैध पैकेजिंग सामग्री (खाली बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और होलोग्राम) के भंडारण और उपयोग की जिम्मेदारी किसकी थी और अंतिम निरीक्षण में क्या रिपोर्ट दी गई थी।
- रीजनल ऑफिसर की भूमिका: युवा मंच ने मांग की है कि रीजनल ऑफिसर अरुण उपाध्याय के कार्यक्षेत्र, दौरा रजिस्टर, स्टॉक सत्यापन रिपोर्ट और निरीक्षण रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए। साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ भी तुरंत FIR दर्ज की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ युवा मंच की प्रमुख मांगें
प्रशासन को सौंपे जाने वाले ज्ञापन के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
- BIS कंपनी पर कार्रवाई: यदि जांच में कंपनी के अनुबंधीय दायित्वों का उल्लंघन या लापरवाही साबित होती है, तो कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए और उसके सभी स्टॉक रिकॉर्ड व अनुबंध दस्तावेजों को जब्त किया जाए।
- आबकारी विभाग की जवाबदेही: नियमित निरीक्षण के बावजूद बड़े पैमाने पर मिलावटी शराब का खेल चलने के लिए संबंधित विभागीय आबकारी अधिकारियों और निरीक्षण टीमों की भी जवाबदेही तय की जाए।
- राजनीतिक प्रभावों से मुक्ति: यह सुनिश्चित किया जाए कि जांच किसी भी बाहरी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से प्रभावित न हो।
राजनीतिक संरक्षण और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर तीखा हमला

नरेंद्र भवानी ने कांकेर सांसद और स्थानीय राजनीतिक माहौल पर भी कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांकेर जिले को धार्मिक राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है, जबकि जमीनी और गंभीर समस्याओं पर जनप्रतिनिधि चुप्पी साध लेते हैं।

युवा मंच का कहना है कि मिलावटी शराब सिंडिकेट के असली गुनहगारों और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई न होना इस बात का संकेत है कि इन्हें किसी न किसी रूप में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो छत्तीसगढ़ युवा मंच उग्र आंदोलन और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक अभियान चलाने के लिए बाध्य होगा।