डेस्क । विश्व प्रसिद्ध और 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का विधिवत आगाज पारंपरिक और अलौकिक रस्म ‘काछनगादी’ के साथ होने जा रहा है। बस्तर राज परिवार, माटी पुजारी और स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति में आयोजित होने वाले इस पवित्र अनुष्ठान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह रस्म केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोक-आस्था और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही अटूट परंपरा का प्रतीक है।

कांटों का झूला: नेताम परिवार की 22 पीढ़ियों का निष्ठापूर्वक सेवा-कार्य
काछनगादी विधान का सबसे दिव्य और हैरतअंगेज आकर्षण बेल के तीखे कांटों से तैयार किया जाने वाला विशेष झूला होता है। इस झूले को बनाने का पारंपरिक दायित्व लामनी (स्कूलपारा) निवासी जगत राम नेताम के परिवार पर है।
परिवार के सदस्य जयराम नेताम के अनुसार, उनका परिवार बीते 22 पीढ़ियों से इस पवित्र सेवा कार्य को पूरी निष्ठा और शुद्धता के साथ निभाता आ रहा है। जंगल से बेल की कांटेदार झाड़ियों और लकड़ियों को लाकर पूर्ण धार्मिक नियमों का पालन करते हुए यह झूला तैयार किया जाता है। शनिवार को यह कांटों का झूला पूरी श्रद्धा के साथ काछन गुड़ी पहुंचाया जाएगा।

11 वर्षीय बालिका ‘पीहू’ पर सवार होंगी देवी काछन
इस वर्ष आयोजित होने वाली पावन रस्म में बैलाबाजार पारा की रहने वाली लगभग 11 वर्षीय बालिका पीहू दास पर रण की देवी ‘काछन देवी’ सवार (आविर्भूत) होंगी।
- बालिका का परिचय: पीहू विद्या ज्योति स्कूल में कक्षा 5वीं की छात्रा हैं।
- अनुष्ठान की प्रक्रिया: अनुष्ठान के दौरान जब देवी काछन बालिका पर सवार होंगी, तब वह बेल के नुकीले कांटों से बने झूले पर बैठकर बस्तर राज परिवार और आम जनता को बस्तर दशहरा के निर्विघ्न और सफल आयोजन का आशीर्वाद (स्वीकृति) प्रदान करेंगी।
- रैला देवी का पूजन: विधान के तहत काछन देवी की बहन रैला देवी के स्वरूप में बालिका गुनगुन की भी विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी।
अनुमति मांगने का पारंपरिक विधान
बस्तर दशहरा की परंपरा के अनुसार, राज परिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव अपने दल-बल और पारंपरिक बाजों के साथ काछन गुड़ी पहुंचेंगे। वहां वे रण की देवी काछन से पर्व को बिना किसी विघ्न-बाधा के संपन्न कराने की औपचारिक अनुमति मांगेंगे।
देवी से हरी झंडी (फूल या आशीर्वाद रूपी अनुमति) मिलते ही बस्तर दशहरा के मुख्य और बहुप्रतीक्षित कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत हो जाती है।

बस्तर अंचल में उत्साह का माहौल
काछनगादी की रस्म संपन्न होते ही समूचा बस्तर अंचल उत्सव के रंग में रंग जाएगा। इस अलौकिक और विहंगम दृश्य का साक्षी बनने के लिए बस्तर के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं का हुजूम काछन गुड़ी में उमड़ने लगा है। देवी का आशीर्वाद मिलते ही बस्तर दशहरा के रथ निर्माण, रथ परिक्रमा और अन्य महत्वपूर्ण विधान एक-एक कर संपन्न किए जाएंगे।