डेस्क । राज्य में होने वाली बहुप्रतीक्षित शिक्षक भर्ती परीक्षा पर उच्च न्यायालय ने एक अहम और बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित करने का आदेश दिया है और राज्य शासन को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर जवाब तलब किया है।

विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण रोस्टर पर जताई गई आपत्ति
यह पूरा मामला शिक्षक भर्ती के लिए जारी किए गए आधिकारिक विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद से ही कुछ अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं ने इसमें दी गई शर्तों तथा लागू किए गए आरक्षण रोस्टर पर गंभीर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि विज्ञापन में तय की गई शर्तें विसंगतिपूर्ण हैं और आरक्षण रोस्टर का पालन नियमानुसार नहीं किया गया है, जिससे कई योग्य अभ्यर्थी अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
डिवीजन बेंच का कड़ा रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने याचिका पर प्राथमिक सुनवाई की। अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत तर्कों और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने राज्य शासन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह भर्ती की शर्तों और आरक्षण रोस्टर को लेकर लगाए गए आरोपों पर अपना रुख स्पष्ट करे।
अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति
हाइकोर्ट के इस फैसले से जहां एक तरफ याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के बीच एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब और हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
सरकार का पक्ष सामने आने और न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि भर्ती प्रक्रिया में संशोधन किया जाएगा या यह नए सिरे से शुरू होगी।