डेस्क । जिले के शासकीय छात्रावासों में व्याप्त कुप्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। बदहाल व्यवस्थाओं से तंग आकर बड़ी संख्या में छात्रों ने एकजुट होकर उग्र प्रदर्शन किया और अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और शासन-प्रशासन से छात्रावासों की स्थिति में तत्काल सुधार की गुहार लगाई।
भोजन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं मुख्य मुद्दे
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्रावासों में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने प्रमुखता से तीन बड़े मुद्दों को रेखांकित किया:
- भोजन की खराब गुणवत्ता: मेस में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- सुरक्षा व्यवस्था में चूक: छात्रावास परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे विशेषकर दूर-दराज से आने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा खतरे में बनी रहती है।
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव: पीने के साफ पानी, जर्जर भवनों की मरम्मत, स्वच्छता, और बिजली जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थियों ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को चेताया कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:
- छात्रावासों की जर्जर और बदहाल व्यवस्था की किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- मेस और बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं अधीक्षकों पर सख्त कार्रवाई हो।
- सुरक्षा मानकों को दुरुस्त कर परिसरों में समयबद्ध सुविधाएं बहाल की जाएं।
प्रशासनिक आश्वासन की दरकार
सुकमा जिले के सुदूर क्षेत्रों से आए इन विद्यार्थियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। फिलहाल, छात्र प्रशासन की ओर से ठोस और त्वरित कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
