डेस्क । धान की फसल पककर तैयार होने के बाद किसानों का सबसे बड़ा लक्ष्य अपनी उपज को सही दाम पर बेचना होता है, ताकि अगली फसल और खेती के लिए लिए गए कर्ज का भुगतान समय पर किया जा सके। लेकिन बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत तोयर और आसपास के गांवों के किसानों के लिए फसल बेचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

लंबी दूरी और खरीदी व्यवस्था से किसान परेशान
वर्तमान में ग्राम तोयर और इसके समीपवर्ती गांवों के किसान अलनार लैम्प्स (LAMPS) से जुड़े धान खरीदी केंद्र पर निर्भर हैं। किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्र की अधिक दूरी और वहां की लचर व्यवस्था के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार लंबी कतारों, समय की कमी और सीमित टोकन व्यवस्था की वजह से किसान अपना पूरा धान सरकारी केंद्र में नहीं बेच पाते।
नतीजतन, कर्ज की अदायगी और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरन किसानों को अपना बचा हुआ धान कम दामों पर निजी मंडियों या बिचौलियों को बेचना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित, 400 से 500 परिवार प्रभावित
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या से क्षेत्र के लगभग 6 गांवों के 400 से 500 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हैं। समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए ग्राम पंचायत तोयर में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से गांव में ही नया धान खरीदी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
भारतीय किसान यूनियन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन का अल्टीमेटम
ग्राम सभा के प्रस्ताव को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी धान खरीदी सीजन से पहले तोयर में नया खरीदी केंद्र स्वीकृत कर शुरू किया जाए।
अपनी जायज मांगों को लेकर किसानों का रुख सख्त नजर आ रहा है। यूनियन और स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते नया केंद्र खोलने की मांग को पूरा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी मांगों के समर्थन में लोहंडीगुड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।