डेस्क । साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे आम लोगों को कानून और पुलिस का डर दिखाकर महीनों तक मानसिक रूप से बंधक बना रहे हैं। रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र (बजरंग नगर, उरकुरा) से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का एक खौफनाक मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक 64 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार को डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 8.50 लाख रुपये ठग लिए।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित बुजुर्ग को साइबर ठगों ने फोन कर खुद को CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और वरिष्ठ IPS अधिकारी बताया। ठगों ने बुजुर्ग पर आरोप लगाया कि वे 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग (रुपयों के अवैध लेनदेन) में शामिल हैं।
पीड़ित को डराने के लिए ठगों ने कहा कि यदि वे उनकी बात नहीं मानेंगे, तो पूरे परिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा।
18 अगस्त से 1 अक्टूबर तक चला खौफ का खेल
शातिर अपराधियों ने बुजुर्ग को 18 अगस्त से 1 अक्टूबर तक लगभग 45 दिनों तक लगातार अपने शिकंजे में रखा:
हर घंटे वीडियो कॉल पर रहने का दबाव: ठगों ने बुजुर्ग को इस कदर डरा दिया था कि वे उन्हें हर घंटे वीडियो कॉल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने पर मजबूर करते थे।
जमा-पूंजी और जेवर तक बिकवाए: गिरफ्तारी और परिवार के फंसने के डर से पीड़ित ने अपनी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई और घर के सोने के जेवर तक बेच दिए।
8.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए: ठगों ने बुजुर्ग को झांसे में लेकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 8.50 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
छोटे भाई से बात करने पर फूटा भंडाफोड़
लगातार तनाव और डर के साये में जी रहे पीड़ित ने आखिरकार हिम्मत जुटाकर इस बात का जिक्र अपने छोटे भाई से किया। छोटे भाई को तुरंत मामला संदिग्ध लगा और उन्होंने बुजुर्ग को समझाया कि यह साइबर ठगी का मामला है। तब जाकर पीड़ित को समझ आया कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम के एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की जानकारी मिलते ही खमतराई थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का ब्योरा खंगाल रही है, जिनका इस्तेमाल इस ठगी में किया गया था। साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
सतर्क रहें: ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती!
पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है।
कोई भी पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती है।
यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आए, तो घबराएं नहीं। फोन तुरंत काटें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
