डेस्क । छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अब 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने के बाद छात्र-छात्राओं को अपनी अंकसूची (मार्कशीट), प्रोविजनल सर्टिफिकेट या माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और न ही मंडल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे।


राज्य सरकार ने छात्रों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल की सेवाओं को छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में शामिल कर दिया है। इसके तहत अब मंडल को निर्धारित समय-सीमा के भीतर विद्यार्थियों को उनके दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
60 दिनों के भीतर मिलेगी मार्कशीट और माइग्रेशन
नए नियमों के अनुसार, परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल को अधिकतम 60 दिनों के भीतर विद्यार्थियों को उनकी मूल मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट प्रदान करना अनिवार्य होगा। यदि इस तय समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।
छात्रों को क्या-क्या होंगे बड़े फायदे?
- चक्कर काटने से मुक्ति: संशोधन, डुप्लीकेट मार्कशीट, माइग्रेशन या ओरिजिनल अंकसूची पाने के लिए अब छात्रों और उनके अभिभावकों को रायपुर स्थित मंडल कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- आगे के प्रवेश में आसानी: समय पर माइग्रेशन और मार्कशीट मिलने से 12वीं के बाद कॉलेज, यूनिवर्सिटी या तकनीकी संस्थानों में एडमिशन लेने वाले छात्रों का साल खराब होने का जोखिम खत्म हो जाएगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: लोक सेवा गारंटी के तहत आने से मंडल के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
हर साल 10वीं-12वीं के नतीजे आने के बाद हजारों छात्र अपनी मार्कशीट में त्रुटि सुधार या माइग्रेशन के लिए भटकते नजर आते थे। लोक सेवा गारंटी कानून के लागू होने से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में यह सुधार विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक पहल है।