बस्तर की बेटी ने बढ़ाया मान: सना खान की हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘काली खेती’ से बॉलीवुड में नई शुरुआत

डेस्क । छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर क्षेत्र के लिए एक बेहद गर्व का पल सामने आया है। जगदलपुर से गहरा नाता रखने वाली सना खान ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखते हुए बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाने की दिशा में मजबूत शुरुआत की है। जगदलपुर के हाटकचोरा निवासी और जाने-माने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोफेशनल काज़िम रज़ा खान की सुपुत्री सना खान अब निर्माता के रूप में अपनी पहली फिल्म ‘काली खेती’ के साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देने जा रही हैं।

ग्रामीण भारत, विरासत और रहस्य का अनूठा मेल

​BlackCanvas Studio के बैनर तले बनी फिल्म ‘काली खेती’ की कहानी ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसे हारिस इम्तियाज़ खान द्वारा लिखा और निर्देशित किया गया है।

​यह केवल एक साधारण हॉरर फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें कृषि, परिवार, परंपरा और पीढ़ियों पुरानी विरासत से जुड़े रहस्यों को बेहद हॉरर और थ्रिलर अंदाज़ में पिरोया गया है। ग्रामीण अंचल के लोक-विश्वासों और अनदेखे पहलुओं को स्क्रीन पर उतारने का यह प्रयास दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव साबित हो सकता है।

​दिग्गज कलाकारों से सजी स्टार कास्ट

​फिल्म ‘काली खेती’ में भारतीय सिनेमा के कई बड़े और मजे हुए चेहरे एक साथ नज़र आएंगे:

  • ​जैकी श्रॉफ: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता, जो फिल्म में एक बेहद प्रभावकारी भूमिका में दिखेंगे।
  • ​शरद केलकर: अपनी दमदार आवाज़ और बेहतरीन अभिनय के लिए मशहूर कलाकार।
  • ​नेहा सरगम: टीवी और सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री।
  • ​वीरेंद्र सक्सेना व शाजी चौधरी: चरित्र अभिनेताओं के रूप में अपनी छाप छोड़ने वाले ये दिग्गज भी अहम किरदारों में नज़र आएंगे।

​23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में होगी रिलीज़

फिल्म का आधिकारिक पोस्टर जारी कर दिया गया है, जिसने सिने-प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। यह ग्रामीण हॉरर फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

​बस्तर जैसी सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पृष्ठभूमि से निकलकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में निर्माता के रूप में अपनी जगह बनाना सना खान की मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है। यह उपलब्धि न केवल बस्तर और छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह भी साबित करती है कि छोटे शहरों से निकली प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा सकती हैं।

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