​सड़कें इतनी खराब कि डिप्टी सीएम तक गिर गए… भूपेश बघेल ने गिनाई सरकार की विफलताएं

​बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने अपने बिलासपुर दौरे के दौरान राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, बदहाल सड़कों, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और बिजली कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। बघेल ने दावा किया कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ गहरी सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency wave) चल रही है।

​मुख्य राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे

  • ​सड़कों की बदहाली और तंज: पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की सड़कों की खस्ता हालत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हालात इतने बदतर हैं कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव तक को स्कूटी से गिरकर चोटिल होना पड़ा।
  • ​बढ़ती महंगाई और जनसमस्याएं: उन्होंने पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, बिजली, बस किराए और राशन की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर जनता की कमर तोड़ने का आरोप लगाया। इसके साथ ही किसानों को एग्रीस्टैक और सर्वर संबंधी समस्याओं से जूझने की बात कही।
  • ​भर्ती परीक्षाएं और कथित गड़बड़ी: सीजीपीएससी (CGPSC), पुलिस और पीडब्ल्यूडी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि सरकार लगातार सामने आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच से क्यों पीछे हट रही है? उन्होंने कवर्धा में अभ्यर्थियों के प्रदर्शन का जिक्र कर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल खड़े किए।
  • ​बिजली संकट: राज्य में बिजली कटौती और अघोषित बिजली संकट का मुद्दा उठाते हुए बघेल ने कहा कि पर्याप्त बिजली उत्पादन होने के बावजूद दूसरे राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिससे किसानों को समय पर बिजली नहीं मिल पा रही और उनकी फसलें संकट में हैं।
  • ​राष्ट्रीय मुद्दे और चुनाव आयोग पर निशाना: दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन का समर्थन करते हुए उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

​राजनीतिक मायने और भविष्य की चुनौतियां

भूपेश बघेल के इन तीखे तेवरों ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को तेज कर दिया है। एक तरफ जहां विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने युवाओं, अभ्यर्थियों और किसानों के असंतोष को शांत करने की बड़ी चुनौती है।

​अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देती है और प्रदेश के युवाओं व किसानों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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