बस्तर । छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी अपनी जटिल भौगोलिक स्थितियों और चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज विकास और बदलाव के एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। हाल ही में अविभाजित मध्यप्रदेश के समय अपनी सेवाएं दे चुके 11 वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों (जिनमें श्री बी.एल. कुरिल, श्रीमती रेणु तिवारी, श्री मनोहर दुबे, श्री सुरेंद्र उपाध्याय, श्री एस.एन. रूपला, श्री भरत अग्रवाल, श्री टी.सी. महावर, श्री डी.डी. सिंह, श्रीमती जयश्री कियावत, श्रीमती सुनीता त्रिपाठी और श्री उल्हास तेलंग शामिल हैं) ने बस्तर का भ्रमण किया। क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक बदलावों को करीब से देखने के बाद उन्होंने एक सुर में कहा—“यह एक नए दौर का बस्तर है।”

शांति, सुरक्षा और विश्वास की नींव
बस्तर में सुरक्षा वातावरण में सुधार और माओवाद के घटते प्रभाव को सेवानिवृत्त अधिकारियों ने क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। शांति और सुरक्षा की बहाली ने बस्तर के लोगों में शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत किया है।
अपनी यात्रा के दौरान अधिकारियों ने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर देश और क्षेत्र की शांति के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जवानों का त्याग और समर्पण ही आज बस्तर में बह रही शांति और विकास की बयार का मुख्य आधार है।

जन-जीवन और पुनर्वास: मुख्यधारा से जुड़ता समाज
बस्तर की असली ताकत वहां के सरल, सहज और मेहनती लोग हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी समृद्ध संस्कृति को सहेज कर रखने वाले बस्तरवासियों के जज्बे को अधिकारियों ने सराहा।
- पण्डुम कैफे में आत्मीय संवाद: जगदलपुर के ‘पण्डुम कैफे’ में अधिकारियों ने आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित युवाओं से मुलाकात की। हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं के हौसले की सराहना करते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह बदलाव न केवल उनके परिवारों, बल्कि पूरे बस्तर के बेहतर भविष्य की रीढ़ बनेगा।
- आध्यात्मिक आस्था: यात्रा के दौरान अधिकारियों ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
पर्यटन और प्राकृतिक समृद्धि: अपार संभावनाएं
चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे अनुपम जलप्रपातों की सुंदरता से अभिभूत होकर पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने रेखांकित किया कि बस्तर केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी लोक परंपराएं, कला और सांस्कृतिक विरासत इसे विश्व स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाती हैं।

शांति का वातावरण बनने से अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और पर्यटन के क्षेत्रों में अभूतपूर्व संभावनाएं खुल गई हैं।
देश का अग्रणी संभाग बनने की ओर अग्रसर
कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह ने पूर्व अधिकारियों के इस प्रवास और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ पूर्व नौकरशाहों का यह मानना है कि बस्तर का यह बदलाव केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन-विश्वास का नया सवेरा है।
सुदृढ़ होती अधोसंरचना, समृद्ध प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर और जनसामान्य की मेहनत के बल पर बस्तर आने वाले समय में न केवल छत्तीसगढ़ का, बल्कि पूरे देश का एक अग्रणी और विकसित संभाग बनने की पूरी क्षमता रखता है।
