बस्तर । प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में बस्तर जिले की ग्राम पंचायत सिलकझोड़ी ने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जनपद पंचायत बास्तानार के अंतर्गत आने वाले इस दुर्गम ग्रामीण अंचल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कुरमंडी नाला (पार्ट-4) पर बनी ‘गेबियन संरचना’ अब जल और मृदा संरक्षण की लाइफलाइन बन चुकी है।

चुनौती से समाधान तक का सफर
कुरमंडी नाला क्षेत्र में मानसून के दौरान तेज जल प्रवाह के कारण भारी तबाही देखने को मिलती थी। उपजाऊ भूमि का लगातार कटाव होने से खेतों की उर्वरता नष्ट हो रही थी, और पानी का ठहराव न होने से जल संकट गहराता जा रहा था। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण नाले के प्राकृतिक स्वरूप को बिना नुकसान पहुंचाए निर्माण सामग्री पहुंचाना और मजबूत ढांचा खड़ा करना तकनीकी अमले के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
इस चुनौती का सामना करने के लिए ग्राम पंचायत सिलकझोड़ी, तकनीकी टीम, ग्राम रोजगार सहायक और स्थानीय ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मोर्चा संभाला। 4 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस कार्य को 1.428 लाख रुपये की लागत से 20 मई 2026 को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया। स्थानीय पत्थरों और तारों की जाली का उपयोग कर एक बेहद मजबूत ‘गेबियन संरचना’ तैयार की गई।

परियोजना के प्रमुख लाभ
- मिट्टी के कटाव पर रोक: गेबियन संरचना ने पानी के तीव्र वेग को नियंत्रित कर दिया है, जिससे आसपास की उपजाऊ मिट्टी का बहना पूरी तरह बंद हो गया है।
- भू-जल स्तर में सुधार: नाले में पानी का ठहराव बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में वाटर रिचार्जिंग तेज हुई है, जिससे भू-जल संवर्धन को नई दिशा मिली है।
- गांव में ही रोजगार की गारंटी: निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को गांव के भीतर ही मनरेगा के तहत रोजगार मिला, जिससे उनके परिवारों की आय में सीधी बढ़ोतरी हुई।
- कृषि और पर्यावरण को मजबूती: मिट्टी और पानी दोनों का ठहराव सुनिश्चित होने से क्षेत्र के किसानों को अपनी फसलों के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है।