डेस्क । छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित बस्तर संभाग अपनी प्राकृतिक सुंदरता, अद्वितीय जनजातीय संस्कृति, कला और लोक परंपराओं के लिए पूरे देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। देश के शीर्ष संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) पर आसीन प्रमुख हस्तियों का बस्तर आगमन हमेशा से इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण रहा है।

अभी तक कुल 5 राष्ट्रपति बस्तर (जगदलपुर/दंतेवाड़ा क्षेत्र) की यात्रा कर चुके हैं।
1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद (प्रथम राष्ट्रपति)

- समय: 1950 के दशक (छत्तीसगढ़ के शुरुआती वर्षों एवं बस्तर की पहली बड़ी राष्ट्रीय यात्राओं में शामिल)
- मुख्य अंश: देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बस्तर के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर वहां की संस्कृति, रहन-सहन और प्रशासनिक स्थिति को करीब से समझा था।
2. ज्ञानी जैल सिंह (सातवें राष्ट्रपति)

- समय: 1980 के दशक
- मुख्य अंश: ज्ञानी जैल सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान बस्तर का दौरा किया था। उन्होंने स्थानीय आदिवासियों की कला एवं लकड़ी-धातु शिल्पकला (बेल मेटल/ढोकरा आर्ट) में गहरी रुचि दिखाई थी।
3. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (ग्यारहवें राष्ट्रपति)

- समय: जून 2004
- मुख्य अंश: भारत के ‘मिसाइल मैन’ कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम बस्तर के जगदलपुर आए थे। उन्होंने यहां के स्थानीय छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया, बस्तर के हर्बल उत्पादों तथा वानिकी आधारित आत्मनिर्भरता की बहुत सराहना की।
4. श्री राम नाथ कोविंद (चौधवें राष्ट्रपति)

- समय: जुलाई 2018
- मुख्य अंश: राम नाथ कोविंद ने अपने 2-दिवसीय दौरे के दौरान बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा और जगदलपुर क्षेत्रों का भ्रमण किया था। उन्होंने यहां के एकीकृत कृषि केंद्रों, हीरामणिक हस्तशिल्प केंद्रों और बीपीओ (BPO) सेंटर का उद्घाटन व अवलोकन कर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया।
5. श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (पंद्रहवीं एवं वर्तमान राष्ट्रपति)

- समय: फरवरी 2026
- मुख्य अंश: देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 7 फरवरी 2026 को जगदलपुर (लालबाग मैदान) पहुंचकर ऐतिहासिक लोक सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कलाओं और स्थानीय व्यंजनों का निरीक्षण किया तथा स्थानीय शिल्पकारों व मांझी-चालकी सामाजिक व्यवस्था के प्रतिनिधियों से संवाद किया।
(नोट: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अक्टूबर 2026 के अंत में प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में भाग लेने हेतु पुनः जगदलपुर आगमन प्रस्तावित है।)
बस्तर के लिए इन दौरों का महत्व
- सांस्कृतिक पहचान को प्रोत्साहन: राष्ट्रपतियों के आगमन से बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला, ढोकरा कला, और प्राकृतिक संपदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलती है।
- विकास और शिक्षा का विस्तार: डॉ. कलाम से लेकर राम नाथ कोविंद और द्रौपदी मुर्मू तक, सभी ने बस्तर के युवाओं, तकनीकी विकास, महिला स्व-सहायता समूहों और शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया है।
- जनजातीय संस्कृति का सम्मान: देश के सर्वोच्च पद से बस्तर की सामाजिक परंपराओं (जैसे मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम) की सराहना वहां के निवासियों में अपार आत्मविश्वास जगाती है।