अधूरे जल जीवन मिशन का दंश: बस्तर के केशलूर में पीने के पानी की किल्लत, ग्रामीण करेंगे एनएच-30 जाम

बस्तर (छत्तीसगढ़): आजादी के दशकों बाद भी बस्तर के कई ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाएं संघर्ष का सबब बनी हुई हैं। ताजा मामला तोकापाल अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत केशलूर का है, जहां पीने के पानी की भीषण समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। नल-जल योजना के तहत लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बावजूद गांव के सैकड़ों परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

​टंकी खड़ी, लेकिन बूंद भर पानी का अकाल

ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना का काम केशलूर में वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि गांव में केवल पानी की कंक्रीट की टंकी खड़ी कर दी गई है, लेकिन नलों तक पानी पहुंचाने की पाइपलाइन और अन्य मूलभूत कार्य अधर में लटके हैं। पानी के अभाव में आए दिन मोहल्लों और हैंडपंपों पर विवाद की स्थिति निर्मित होती है, जिससे गांव का सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है।

​विशेष ग्राम सभा में चक्काजाम का बड़ा फैसला

पेयजल संकट से तंग आकर ग्राम पंचायत केशलूर में 6 अक्टूबर 2026 को एक विशेष ग्राम सभा बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शासन-प्रशासन की उपेक्षा के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

​ग्राम सभा के प्रस्ताव के अनुसार, अपनी जायज मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ग्रामीण 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से नेशनल हाईवे-30 पर 2 घंटे का उग्र प्रदर्शन एवं चक्काजाम करेंगे।

​एसडीएम तोकापाल को सौंपा गया ज्ञापन

अपनी इस भावी रणनीति और आंदोलन की पूर्व सूचना देते हुए ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/एसडीएम) तोकापाल, जिला बस्तर को ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों को अवगत कराया गया है कि यदि चक्काजाम के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति निर्मित होती है या आवागमन बाधित होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अधूरा काम छोड़ने वाले संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि ग्राम पंचायत केशलूर में जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को तत्काल पूरा कराया जाए और गांव में स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति शुरू की जाए, ताकि उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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