जगदलपुर। बस्तर संभाग का मुख्यालय जगदलपुर इन दिनों गंभीर बिजली संकट और चरमराती विद्युत व्यवस्था से जूझ रहा है। शहर में बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की मुख्य जिम्मेदारी विद्युत विभाग की है, लेकिन विभागीय स्टाफ की भारी कमी के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर में स्वीकृत पदों में से आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण मेंटेनेंस से लेकर उपभोक्ताओं की दैनिक समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है।

आधा स्टाफ, दुगुनी चुनौतियां: 117 में से 64 पद रिक्त
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जगदलपुर शहरी विद्युत क्षेत्र में नियमित कर्मचारियों के कुल 117 पद स्वीकृत हैं। हालांकि, वर्तमान में इनमें से 64 पद खाली पड़े हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि विभाग महज 53 नियमित कर्मचारियों के भरोसे पूरे संभाग मुख्यालय की विद्युत आपूर्ति संभालने को मजबूर है।
फील्ड स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की इस भारी किल्लत की वजह से मैदानी स्तर पर काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। नियमित कर्मचारियों की कमी की भरपाई के लिए विभाग को बड़े पैमाने पर ठेका (संविदा) कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं की बढ़ीं परेशानियां
स्टाफ की कमी का सीधा असर शहर की आम जनता और उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। शहरवासी लगातार निम्नलिखित समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं:
- फाल्ट सुधारने और मेंटेनेंस में देरी: आंधी-तूफान या सामान्य तकनीकी खराबी आने पर फाल्ट सुधारने में घंटों का समय लग रहा है।
- नए कनेक्शन में विलंब: नए विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
- लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग: शहर के कई इलाकों में लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली ट्रिप होने की समस्या आम बात हो गई है।
- घंटों बिजली गुल: मेंटेनेंस स्टाफ की कमी के कारण एक बार बिजली गुल होने पर बहाली में अनिश्चितता बनी रहती है।
भर्ती प्रक्रिया जारी, जल्द राहत की उम्मीद
विद्युत विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी ही व्यवस्था के बिगड़ने का मुख्य कारण है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनी द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही रिक्त पड़े पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी। नई भर्ती पूरी होते ही फील्ड स्टाफ की कमी दूर होगी और शहर की विद्युत व्यवस्था एक बार फिर पूरी तरह से पटरी पर लौट आएगी। तब तक के लिए सीमित संसाधनों और ठेका कर्मियों के सहारे ही आपूर्ति बहाल रखने की कोशिश की जा रही है।