जगदलपुर, बस्तर। मां दंतेश्वरी की पावन और ऐतिहासिक धरा बस्तर से सहकारिता के एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप का गुरुवार को जगदलपुर में भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन व सुझाव पर आयोजित यह 9वां राष्ट्रीय सम्मेलन बेहद ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पहली बार है जब बस्तर जैसे आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्र में किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया गया है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता आंदोलन के जरिए देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास और आर्थिक समृद्धि का लाभ पहुंचाना है।
अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ, वही सहकारिता की असली पहचान: डॉ. आशीष भूटानी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने जोर देकर कहा कि सहकारिता की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब इसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई दे।
- परिवर्तन की मिसाल: उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य असम का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वहां शांति बहाली के बाद विकास ने रफ्तार पकड़ी, ठीक वैसा ही अभूतपूर्व और सकारात्मक बदलाव आज बस्तर की धरती पर भी महसूस किया जा रहा है।
- PACS को सशक्त बनाने का रोडमैप: प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी हैं। डॉ. भूटानी ने देश भर में 2 लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स की स्थापना, उनके 100% डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में रूपांतरण और विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
- आधुनिक क्षेत्रों में अवसर: नाबार्ड (NABARD), एनडीसी (NCDC) और एनडीडीबी (NDDB) जैसी शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से पैक्स को डेयरी, मत्स्य पालन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में विस्तार करने तथा सहकारी बैंकिंग को वित्तीय रूप से पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ का विज़न: कृषि से लेकर प्रसंस्करण और औद्योगिक विस्तार
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य में सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का स्पष्ट रोडमैप पेश किया:
- नई समितियों का गठन: राज्य में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियां गठित की जा चुकी हैं।
- डिजिटल और आधुनिक सेवाएं: पैक्स को डिजिटल करने के साथ-साथ माइक्रो-एटीएम और सीएससी (CSC) सुविधाओं से लैस किया गया है, जिससे ग्रामीणों को घर-पहुंच नागरिक सेवाएं मिल रही हैं और समितियों की आय भी बढ़ रही है।
- औद्योगिक विस्तार: राज्य में कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
- मजबूत सप्लाई चेन: गुजरात और महाराष्ट्र के सफल मॉडल की तर्ज पर ‘इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल’ हासिल करने के लिए नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और बीबीएसएसएल (BBSSL) जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।
तमिलनाडु का मॉडल और राज्यों की सहभागिता
सम्मेलन में तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव (सहकारिता) पी. अमुधा ने अपने राज्य के सफल मॉडल को साझा किया। तमिलनाडु ने केंद्र के दिशा-निर्देशों पर आधारित 1, 3 और 5 वर्षीय विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किए हैं। राज्य की सहकारी समितियां राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर स्थानीय उत्पादों को एक प्रतिस्पर्धी और मजबूत बाजार मंच प्रदान कर रही हैं।
आपदा को चुनौती मानकर रचा इतिहास: बस्तर के जीवट की मिसाल
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर की अदम्य इच्छाशक्ति का एक भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण सामने रखा। उन्होंने बताया कि मात्र 15 दिन पहले ही यह पूरा क्षेत्र भारी जलभराव से जूझ रहा था और सम्मेलन का सभागार भी पानी में डूबा हुआ था। लेकिन स्थानीय प्रशासन और पूरी टीम ने इस प्राकृतिक आपदा को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और बहुत कम समय में परिसर का कायाकल्प कर इसे इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार कर दिया।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि बस्तर अब अतीत के संघर्षों को पीछे छोड़ विकास की मुख्यधारा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
प्रमुख प्रस्तुतियां और उपस्थिति
- लघु फिल्म और उत्पाद स्टॉल: कार्यक्रम की शुरुआत सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर आधारित एक लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुई। साथ ही, आयोजन स्थल पर विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा अपने स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं।
- वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी: इस अवसर पर बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, भारत सरकार व विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव, पंजीयक और सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
निष्कर्ष
जगदलपुर में आयोजित यह दो दिवसीय विचार-मंथन देश भर में ‘सहकार से समृद्धि’ के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर की यह पहल यह दर्शाती है कि सहकारिता ही वह माध्यम है जो देश के सुदूर और जनजातीय अंचलों को आर्थिक स्वावलंबन और मुख्यधारा के विकास से जोड़ सकती है।



