UPI पेमेंट करने वालो के लिए बड़ी खबर ….सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन….

डेस्क । भारत में डिजिटल पेमेंट की रीढ़ बन चुके UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) को सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार और NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने कई अहम बदलाव किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना, फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना और पेमेंट सिस्टम पर बढ़ते सर्वर लोड को संतुलित करना है।

​प्रमुख नए दिशा-निर्देश और बदलाव

​1. ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर पूर्णतः ज़ीरो चार्ज

​वित्त मंत्रालय के नए गजट नोटिफिकेशन के तहत ₹2,000 तक के सभी प्रकार के डिजिटल UPI और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर किसी भी तरह का चार्ज (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) लगाने पर पूरी रोक लगा दी गई है।

  • ​पीयर-टू-पीयर (P2P): एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (दो दोस्तों या रिश्तेदारों) को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
  • ​व्यापारी भुगतान (P2M): बड़ा भ्रम दूर करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों को ₹2,000 से अधिक के व्यापारी पेमेंट पर भी कोई फीस नहीं देनी होगी। ₹2,000 से ऊपर के कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारी (MDR) ढाँचे में आते हैं, जिसका असर आम ग्राहक की जेब पर नहीं पड़ता।
  • ​छोटे व्यापारी (P2PM): ₹1 लाख/माह तक UPI QR से स्वीकार करने वाले रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों के लिए MDR पूरी तरह शून्य (Zero) रखा गया है।

​2. बैलेंस इंक्वायरी और खाता लिस्टिंग पर सीमा

​सर्वर पर अनावश्यक लोड घटाने के लिए NPCI ने तकनीकी स्तर पर सीमाएँ लागू की हैं:

  • ​बैलेंस चेक सीमा: अब उपभोक्ता किसी भी UPI ऐप से दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस इंक्वायरी कर सकेंगे।
  • ​लिंक्ड अकाउंट्स (List Account API): एक ऐप पर जुड़े बैंक खातों की सूची देखने की सीमा प्रतिदिन अधिकतम 25 बार तय की गई है।
  • ​फायदा: बैकग्राउंड में चलने वाले ऑटो-चेक बंद होंगे, जिससे पीक आवर्स के दौरान पेमेंट फेल होने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

​3. निष्क्रिय (Inactive) UPI ID होंगी बंद

​अगर कोई UPI ID या उससे जुड़ा मोबाइल नंबर लगातार 12 महीने (1 वर्ष) से अधिक समय से निष्क्रिय है, तो उसे सुरक्षा कारणों से ब्लॉक कर दिया जाएगा। इससे पुराने/बंद हो चुके मोबाइल नंबरों के दोबारा री-अलॉट होने पर होने वाली धोखाधड़ी रुकेगी।

​4. ऑटोपे (Autopay) और सब्स्क्रिप्शन टाइमिंग

​SIP, बिजली बिल, OTT सब्स्क्रिप्शन और EMI जैसी ऑटो-डेबिट भुगतानों को अब Non-Peak (कम ट्रैफिक वाले) समय में प्रोसेस किया जाएगा। साथ ही, किसी वजह से ऑटो-डेबिट फेल होने पर अधिकतम 4 बार ही पुनः प्रयास (1 मूल + 3 री-ट्राई) किया जा सकेगा।

​5. उच्च मूल्य लेनदेन सीमाओं में छूट

​सामान्य P2P भुगतानों के लिए ₹1 लाख की दैनिक सीमा बरकरार है। हालाँकि, सरकार ने विशिष्ट और सत्यापित श्रेणियों जैसे कि टैक्स भुगतान, मेडिकल बिल, शिक्षा शुल्क और कैपिटल मार्केट (Mutual Funds/Stocks) के लिए दैनिक सीमा को बढ़ाकर अधिक सुविधाजनक बना दिया है।

एक नज़र में: क्या बदला और क्या नहीं?

सुविधा / नियम

नया दिशा-निर्देश / स्थिति

P2P ट्रांसफर (व्यक्ति से व्यक्ति)

पूरी तरह निःशुल्क (कोई सीमा या चार्ज नहीं)

₹2,000 तक मर्चेंट भुगतान

100% फ्री (ग्राहक एवं छोटे व्यापारी दोनों हेतु)

दैनिक बैलेंस चेक लिमिट

अधिकतम 50 बार (प्रति ऐप/प्रतिदिन)

निष्क्रिय UPI ID नियम

12 महीने बंद रहने पर UPI ID डी-एक्टिवेट होगी

ऑटो-डेबिट री-ट्राई कैप,- अधिकतम 4 प्रयास

उपभोक्ताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

  1. ​कम सर्वर फेलियर: सर्वर लोड कम होने से “Payment Pending” या “Transaction Failed” की समस्या में भारी कमी आएगी।
  2. ​अधिक सुरक्षा: बंद नंबरों पर तुरंत कार्रवाई और सख्त बैंक वेरिफिकेशन से ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगेगी।
  1. ​रोजमर्रा के इस्तेमाल में कोई रुकावट नहीं: आम आदमी के चाय-नाश्ते, किराना खरीदारी या दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने के तरीकों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं जुड़ा है।

​सरकार और NPCI का यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निर्बाध बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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