बाढ़ ने मचाई तबाही…देखिये ड्रोन की नजर से नीचे सिर्फ पानी ही पानी

जगदलपुर । छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध बस्तर अंचल इस समय भारी बारिश और भीषण बाढ़ की चपेट में है। बंगाल की खाड़ी में बने दबाव के कारण हुई मूसलाधार बारिश ने जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जल-प्रलय जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

​इंद्रावती का उफान और निचली बस्तियों में तबाही

​क्षेत्र की मुख्य जीवनदायिनी इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान (8.30 मीटर) को पार कर 12 मीटर से अधिक पहुंच गया। जगदलपुर शहर की निचली बस्तियों—जैसे प्रवीर वार्ड, डोंगाघाट, पनारापारा और आसना क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों के अंदर घुस गया है। नदी किनारे कई कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं।

​300 से अधिक गांव बने टापू, संपर्क टूटा

​ग्रामीण अंचलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। तोकापाल, नगरनार, भेजापदर और घाट धनोरा जैसे 300 से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन चुके हैं।

  • ​सड़क यातायात: राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (रायपुर-कोटा) और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 (जगदलपुर-बीजापुर) पर पुल-पुलियों के ऊपर पानी बहने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • ​रेल व हवाई सेवा: केके (किरंदुल-कोत्तावालसा) रेल लाइन पर जगह-जगह लैंडस्लाइड होने से ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, वहीं जगदलपुर से हवाई उड़ानें भी स्थगित रहीं।

​सेना और SDRF का मोर्चा: जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन

​बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन, पुलिस (DRG) और SDRF की टीमें 24 घंटे मुस्तैद हैं।

  • ​डोंगाघाट और अन्य बेहद संवेदनशील जलमग्न इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर और मोटरबोट्स की मदद ली जा रही है।
  • ​जगदलपुर और आसपास के जिलों में 40 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं। इनमें 6,000 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित लोगों को ठहराया गया है, जहां उनके लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, और दवाओं का निःशुल्क प्रबंध किया जा रहा है।

​प्रशासन की अपील और आगे की उम्मीद

​कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे उफान मारते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

हालांकि बारिश थमने के संकेत मिले हैं, लेकिन ऊपरी इलाकों से पानी की आवक बने रहने के कारण अगले 24 से 48 घंटों तक बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन की सतर्कता और राहत दलों की तत्परता से स्थिति को जल्द नियंत्रित करने का प्रयास जारी है। 

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