पाकिस्तान से बस्तर तक साइबर ठगी का जाल: लोन के बहाने मोबाइल में घुसा ‘साइबर वायरस’, क्या छोटी रकम के पीछे छिपा है बड़ा नेटवर्क?

जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर अंचल में अब साइबर अपराधियों की नजरें टिक गई हैं। हाल ही में जगदलपुर में सामने आए एक मामले ने न सिर्फ बस्तर पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता की नई वजह दे दी है। बस्तर की एक महिला को कम ब्याज दर पर लोन देने का लालच देकर साइबर ठगी की कोशिश की गई। प्रक्रिया के नाम पर एक अज्ञात ऐप डाउनलोड कराया गया और खाते से पैसे ऐंठ लिए गए।

​मामला पहली नजर में सामान्य ऑनलाइन फ्रॉड जैसा दिखता है, लेकिन बस्तर पुलिस की प्रारंभिक साइबर जांच में जो कड़ी सामने आई है, उसने इस ठगी के तार सरहद पार पाकिस्तान से जुड़ने का इशारा किया है।

​कैसे बुना गया ठगी का जाल?

​पीड़ित महिला के पास एक अनजान अंतरराष्ट्रीय/वर्चुअल नंबर से कॉल आया था। कॉलर ने खुद को एक लोन फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बहुत ही लुभावने ऑफर दिए। लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाते हुए महिला के मोबाइल में एक विशेष लिंक भेजकर ऐप डाउनलोड करवाया गया।

​जैसे ही महिला ने वह ऐप इंस्टॉल किया, ठगों को उसके फोन का रिमोट एक्सेस (नियंत्रण) मिल गया और प्रक्रिया शुल्क व अन्य बहानों से उसके खाते से पैसे पार कर दिए गए।

​पाकिस्तान कनेक्शन और करेंसी का गणित

​जांच में जिस नंबर से कॉल आया था, उसका लोकेशन और रूटिंग पाकिस्तान से जुड़ा पाया गया है। यद्यपि ठगी गई रकम महज एक से दो हजार रुपये के आसपास की है, लेकिन पुलिस इसे केवल एक-दो हजार का नुकसान मानकर खारिज नहीं कर रही है।

​यहाँ अर्थशास्त्र और करेंसी वैल्यू का खेल समझने की जरूरत है:

  • ​भारतीय करेंसी का मूल्य पाकिस्तानी रुपये (PKR) की तुलना में काफी अधिक है।
  • ​वर्तमान विनिमय दर के हिसाब से भारत का 1,000 रुपये पाकिस्तान में लगभग 2,897 रुपये (PKR) के बराबर बैठता है।
  • ​ऐसे में अगर कोई गिरोह भारत के हजारों लोगों से 1-1 हजार रुपये भी ऐंठता है, तो पाकिस्तान में बैठे अपराधियों के लिए यह एक बहुत बड़ा फंड (फायदे का सौदा) बन जाता है।

​सुरक्षा एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या बस्तर जैसे शांत क्षेत्रों में छोटी-छोटी रकम ठगकर कोई संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ‘माइक्रो-फाइनेंशियल साइबर अटैक’ चला रहा है?

​क्या भारत में मौजूद हैं स्थानीय स्लीपर मॉड्यूल्स?

​सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान में बैठे साइबर ठग सीधे भारतीय बैंक खातों को टारगेट कर रहे हैं या भारत के ही किसी अन्य राज्य (जैसे जामताड़ा, मेवात आदि) में बैठे बिचौलियों का सहारा लिया जा रहा है? क्योंकि बैंक खातों और यूपीआई आईडी की व्यवस्था स्थानीय मदद के बिना होना मुश्किल है। जगदलपुर पुलिस अब इस मामले के आगे-पीछे के कड़ियों को जोड़ रही है।

​पुलिस की त्वरित कार्रवाई और एडवाइजरी

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कदम उठाए हैं:

  1. ​नंबरों की ब्लॉकिंग: ठगी में इस्तेमाल किए गए नंबरों को टेलिकॉम अथॉरिटी के जरिए ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  2. ​NCRP रिपोर्टिंग: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मामले की पूरी डिटेल दर्ज कराई गई है ताकि देशव्यापी डेटाबेस से इसका मिलान हो सके।
  3. ​लोन ऐप से बचें: प्ले स्टोर/एप स्टोर के बाहर किसी अज्ञात लिंक (APK फाइल) से कोई भी लोन ऐप डाउनलोड न करें।
  4. अनजान नंबर पर भरोसा न करें: वित्तीय लेनदेन या पर्सनल डिटेल कभी भी किसी अनजान कॉलर से साझा न करें।
  5. तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आप किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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