डेस्क । स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य के 5 लाख से अधिक दृष्टिदोष से पीड़ित बच्चों की आंखों पर संकट मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त महीने में राज्यभर में नि:शुल्क पावर चश्मा वितरण की उपलब्धि शून्य दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य संचालनालय ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए राजधानी रायपुर समेत 25 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। विभाग ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पात्र बच्चों को शत-प्रतिशत चश्मों का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
जांच में डराने वाले आंकड़े: -4 तक पहुंचा बच्चों का पावर
स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों की नियमित आई-चेकअप रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है। अकेले रायपुर जिले में 50 हजार से अधिक बच्चों की आंखों की जांच की गई, जिनमें से 3,033 बच्चों की नजर कमजोर पाई गई।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, कई छोटे बच्चों को माइनस 3 से माइनस 4 नंबर तक के चश्मे की जरूरत पाई गई है। समय पर चश्मा न मिलने से बच्चों की आंखों का पावर और तेजी से बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इन 25 जिलों के CMHO पर गिरी गाज
स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही बरतने वाले जिन जिलों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- मध्य व मैदानी क्षेत्र: रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी।
- बस्तर संभाग: बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर।
- सरगुजा व बिलासपुर संभाग: बलरामपुर, जशपुर, कोरबा, कोरिया, रायगढ़, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती।
- नवनिर्मित व अन्य जिले: जीपीएम (गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही), केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई), एमएमएसी (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) और कवर्धा।
पढ़ाई प्रभावित, जिम्मेदार कौन?
राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समय रहते बच्चों में दृष्टिदोष की पहचान कर उन्हें नि:शुल्क चश्मा उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए। लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण बजट और योजनाएं होने के बावजूद बच्चों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है।
स्वास्थ्य संचालनालय के अल्टीमेटम के बाद अब देखने वाली बात यह होगी कि 25 जिलों की स्वास्थ्य मशीनरी एक सप्ताह के भीतर कितने बच्चों तक चश्मा पहुंचा पाती है।