जगदलपुर । बस्तर संभाग की शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत और सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बस्तर के तीन प्रमुख संवेदनशील जिलों—सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के दौरे पर हैं। इस दौरान वे स्वयं पोटा केबिनों, सरकारी स्कूलों और छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक ले रहे हैं।

प्रमुख बिंदु और मुख्य निर्णय:
- बंद स्कूलों को दोबारा शुरू करने की तैयारी: विभिन्न कारणों (भौगोलिक, सुरक्षा या अन्य परिस्थितियों) से लंबे समय से बंद पड़े बस्तर के स्कूलों को पुनः संचालित करने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है।
- पोटा केबिनों का स्थायीकरण: पोटा केबिनों की सुरक्षा और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से इन्हें पक्के व स्थायी भवनों में बदला जाएगा। साथ ही, इनमें छात्रावास की बेहतर सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।
- जर्जर स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार: जर्जर और अति-जर्जर स्कूल भवनों के नवीनीकरण के लिए भारत सरकार के सहयोग से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके।
- संलग्नीकरण (Attachment) पर सख्त रोक: शिक्षकों के अनुचित संलग्नीकरण पर रोक लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिक्षकों को अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूल में ही सेवा देनी होगी।
- शिक्षकों की व्यवस्था और नई भर्ती: युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के जरिए शिक्षक-विहीन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, आगामी शिक्षक भर्तियों में बस्तर संभाग को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी तथा जरूरत के अनुसार अतिथि शिक्षकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
शिक्षा मंत्री का वक्तव्य:
”बस्तर के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। पोटा केबिन, सुघर छात्रावास और स्कूलों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी स्कूल में पढ़ाई प्रभावित न हो।”