जगदलपुर । जगदलपुर में आयोजित कांग्रेस के संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी कांड की जाँच और संभावित फैसले को लेकर केंद्र व जाँच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अधूरी और दिशाहीन जाँच के आधार पर आने वाले फैसले से सही न्याय मिलना नामुमकिन है।
जाँच प्रक्रिया पर भूपेश बघेल के प्रमुख आरोप:
- राजनीतिक व आपराधिक षड्यंत्र की अनदेखी: भूपेश बघेल ने कहा कि 25 मई 2013 की यह घटना विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक और आपराधिक षड्यंत्र थी। हालाँकि, जाँच में जिस मुख्य साजिश (कॉन्स्पिरेसी) का पर्दाफाश होना चाहिए था, उस बिंदु पर कोई कार्रवाई ही नहीं की गई।
- प्रत्यक्षदर्शियों के बयान नहीं दर्ज हुए: एनआईए (NIA) कोर्ट ने घटना के समय झीरम घाटी में मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के बयान तक दर्ज नहीं किए।
- अधूरी पूछताछ और मुख्य कड़ियों की उपेक्षा: घटना में शामिल और बाद में सरेंडर करने वाले नक्सली गुडसा उसेंडी से सही तरीके से पूछताछ नहीं हुई। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश की जेलों में बंद कई संदिग्ध नक्सलियों के बयान भी इस मामले में नहीं लिए गए।
न्याय की उम्मीद न के बराबर
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसी ने अदालत में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, न्यायालय उसी के आधार पर अपना फैसला सुनाएगा। चूँकि जाँच में कई बुनियादी और महत्त्वपूर्ण तथ्यों को शामिल ही नहीं किया गया है, इसलिए आम जनता और कांग्रेस पार्टी जिस न्याय और सच्चाई की उम्मीद कर रही थी, उसकी संभावना अब न के बराबर है।

