NMDC में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति का विरोध: युवाओं में आक्रोश, कांग्रेस ने किया घेराव

दंतेवाड़ा: एनएमडीसी (NMDC) की बचेली और किरंदुल परियोजनाओं में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव के खिलाफ स्थानीय युवाओं और राजनीतिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। क्षेत्र के हजारों शिक्षित व योग्य बेरोजगार युवाओं ने इसे अपने भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ करार दिया है।

​लंबे समय से अटकी है नियमित भर्ती

स्थानीय युवाओं का आरोप है कि NMDC प्रबंधन द्वारा पिछले कई वर्षों से नियमित पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।

  • ​लंबित भर्तियाँ: विशेष रूप से एल-1 (L-1) और एल-2 (L-2) समेत कई महत्त्वपूर्ण श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया सालों से अटकी पड़ी है।
  • ​पदोन्नति और नए अवसरों पर असर: युवाओं का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नौकरी देने से न केवल नई पीढ़ी के लिए रोजगार के रास्ते बंद हो रहे हैं, बल्कि संस्थान में कार्यरत मौजूदा कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं।

​युवा कांग्रेस और जिला कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

प्रबंधन के इस फैसले के विरोध में जिला कांग्रेस और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है:

  • ​रैली और घेराव: बचेली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर प्रांगण में सैकड़ों की संख्या में युवा और कार्यकर्ता एकत्र हुए, जहाँ से एनएमडीसी चेकपोस्ट तक विशाल रैली निकाली गई।
  • ​सुरक्षाबलों से धक्का-मुक्की: विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सीआईएसएफ (CISF) के जवानों ने चेकपोस्ट का मुख्य गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। गेट के सामने करीब एक घंटे तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।

​प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम

हंगामे और विरोध के बाद NMDC के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) श्रीधर कोडाली स्वयं धरना स्थल पर पहुँचे। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (CMD) के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि 10 से 15 दिनों के भीतर लंबित पदों के लिए नई भर्ती अधिसूचना जारी नहीं की जाती और पुनर्नियुक्ति का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

​निष्कर्ष

बस्तर संभाग का युवा वर्ग लंबे समय से देश के इस नवरत्न उपक्रम में स्थानीय रोजगार की उम्मीद लगाए बैठा है। अब देखना यह होगा कि दंतेवाड़ा जिले के इस जनाक्रोश और अल्टीमेटम के बाद NMDC प्रबंधन इस पर क्या कदम उठाता है।

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