बस्तर में चक्रवात ‘अर्नब’ का खतरा काम, पर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बरकरार

डेस्क । बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर बस्तर अंचल के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अंचल में इस चक्रवात का असर अनुमान से काफी कम रहने की संभावना है। तेज हवाओं का खतरा अब लगभग समाप्त हो चुका है और केवल हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

हालाँकि, मौसम का यह रुख बदलते ही एक तरफ जहाँ राहत की सांस ली जा रही है, वहीं दूसरी ओर नदी तटीय इलाकों में रहने वाले किसानों की चिंताएं और गहरा गई हैं।

राहत और सुरक्षा उपाय: मुस्तैद है आपदा प्रबंधन

​संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बाढ़ एवं राहत कार्यों के लिए सुरक्षा बलों और बचाव दल को तैनात रखा गया है:

  • बल एवं जवान: SDRF के 30 और DDRF के 20 जवान स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, साथ ही NDRF की टीम भी तैनात है।
  • ​बचाव संसाधन: राहत कार्यों के लिए कुल 11 मोटर बोट तैयार रखी गई हैं, जिनमें से 4 मोटर बोट्स को किसी भी आपात स्थिति के लिए तत्काल रवाना होने हेतु स्टैंडबाय पर रखा गया है।
  • ​डैम के गेट बंद: खातीगुड़ा डैम के दोनों खुले गेट्स को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इंद्रावती नदी का जलस्तर और बहाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।

​किसानों पर दोहरी मार: फसल बर्बाद, मुआवजे का इंतज़ार

​चक्रवात का खतरा टलने के बावजूद इंद्रावती नदी के तटीय क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ की आशंका से किसान बेहद चिंतित हैं। बीते दिनों हुई बारिश और बाढ़ ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।

​“मैंने चार एकड़ ज़मीन पर धान की फसल लगाई थी, लेकिन बाढ़ और लगातार बारिश की वजह से पूरी फसल तबाह हो गई। पिछली बाढ़ में हुए नुकसान का मुआवजा भी अब तक नहीं मिल पाया है। समझ नहीं आ रहा कि परिवार का गुज़ारा कैसे होगा।”

— पीड़ित किसान

​बस्तर के किसानों के सामने अब अपनी बची-कुची फसल को बचाने और हुए नुकसान की भरपाई पाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।

​विमान सेवा जल्द होने की उम्मीद

​मौसम की स्थिति में सुधार को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि एहतियात के तौर पर स्थगित की गई बस्तर की विमान सेवाएं (Flight Services) अगले दिन तक पुनः शुरू हो सकती हैं।

​हालाँकि, बस्तर में बदल रहे मौसम के मिज़ाज और परिवहन सेवाओं की स्थिति पर लगातार नज़र रखना बेहद ज़रूरी है।

​निष्कर्ष

​चक्रवात ‘अर्नब’ के कमजोर पड़ने से भले ही बड़े पैमाने पर होने वाली तबाही का खतरा टल गया हो, लेकिन बस्तर के अन्नदाता जिस संकट से गुजर रहे हैं, उसके लिए तात्कालिक प्रशासनिक सहायता और मुआवजे की त्वरित प्रक्रिया की सख्त आवश्यकता है।

Share :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *