डेस्क । छत्तीसगढ़ के किसानों पर कुदरत और व्यवस्था की दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ ‘अनर्ब’ (Unarb) तूफान के प्रभाव से बेमौसम बारिश ने बस्तर से लेकर सरगुजा तक तैयार खड़ी फसलों को तबाह कर दिया है, तो दूसरी तरफ पटवारियों की हड़ताल के कारण फसलों के नुकसान का आकलन और धान खरीदी से जुड़े पंजीयन कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से तत्काल प्रभाव से सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

कुदरत का कहर: कटाई के मुहाने पर खड़ी फसलें बर्बाद
राज्य में इन दिनों धान और अन्य खरीफ फसलें पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी हैं, और कई इलाकों में कटाई का काम भी शुरू हो गया था। ऐसे समय में अचानक आए अनर्ब तूफान और लगातार हो रही बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “बस्तर से लेकर सरगुजा तक लगातार बारिश हो रही है। किसानों की फसलें पककर तैयार थीं और कटाई शुरू हो चुकी थी, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया है।” उन्होंने सरकार से मांग की है कि तुरंत नुकसानी का मुआयना (सर्वे) कराया जाए और प्रभावित किसानों को बिना किसी देरी के मुआवजा प्रदान किया जाए।
सरकार की उदासीनता: बाढ़ के मुआवजे का अता-पता नहीं
किसानों का दर्द सिर्फ इस बार के तूफान तक सीमित नहीं है। इससे पहले आई बाढ़ के दौरान भी किसानों की फसलें बड़े पैमाने पर खराब हुई थीं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अधिकांश किसानों को अब तक उसका मुआवजा नहीं मिल पाया है।
दीपक बैज ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि पिछली प्राकृतिक आपदाओं में हुए नुकसान का मुआवजा आज तक किसानों के खातों तक नहीं पहुंच पाया है, और अब नई आपदा ने अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
पटवारी हड़ताल और प्रशासनिक नाकामी से ठप हुआ आकलन
संकट को और गहरा कर रही है मैदानी स्तर पर चल रही पटवारियों की हड़ताल। फसलों के नुकसान के आकलन की मुख्य जिम्मेदारी पटवारियों की होती है, लेकिन उनके हड़ताल पर होने के कारण न तो बस्तर में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे हो पाया है और न ही वर्तमान तूफान से बर्बाद हुई फसलों का आंकलन संभव हो पा रहा है।
इसके साथ ही, किसानों के धान खरीदी पंजीयन और अन्य कृषि कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पीसीसी अध्यक्ष ने इसे “सरकार की सीधी नाकामी” करार देते हुए कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
“पटवारी हड़ताल पर हैं, जिससे फसलों के नुकसान का सही आकलन और पंजीयन नहीं हो पा रहा है। यह पूरी तरह सरकार की नाकामी है। सरकार को तत्काल हड़तालियों से बातचीत कर इस समस्या का ठोस समाधान निकालना चाहिए।”
— दीपक बैज, पीसीसी चीफ
अब आगे क्या?
अन्नदाताओं का यह संकट छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। समय पर सर्वे न होने से किसानों को बीमा और सरकारी सहायता का लाभ मिलने में भी भारी अड़चनें आएंगी।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार पटवारियों की हड़ताल खत्म करवाने और बेमौसम बारिश से बेहाल किसानों को राहत पहुंचाने के लिए क्या त्वरित कदम उठाती है।