डेस्क । छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों हवा का रुख कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है। सत्ता के गलियारों से लेकर संगठन के चाय-चौपालों तक एक ही सवाल सबसे ज्यादा तैर रहा है—छत्तीसगढ़ भाजपा का अगला ‘कप्तान’ कौन?

भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को लेकर लंबे समय से बदलाव की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन हाल ही में सड़क हादसे में उनके घायल होने के बाद इन अटकलों ने और तेजी पकड़ ली है। यद्यपि हादसे से पहले भी किरण सिंहदेव का मन इस जिम्मेदारी में बहुत ज्यादा रमता हुआ नहीं दिख रहा था—पिछले दिनों कैबिनेट विस्तार के दौरान मंत्री पद की लालसा और उनके बयानों ने इस बात को हवा भी दी थी। हालांकि, आलाकमान के निर्देश पर उन्होंने फिर से संगठन की कमान संभाली, लेकिन अब परिदृश्य पूरी तरह बदलता दिख रहा है।
जन-जी (Gen Z) का दौर और नेतृत्व का संकट
मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव की अपनी सीमाएं और सांगठनिक ढांचा रहा है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यही उभर कर आता है कि क्या उनके नेतृत्व में भाजपा ‘जन-जी’ (Gen Z) के दौर में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने का जोखिम उठा सकती है?
आज की राजनीति केवल पारंपरिक बैठकों और दौरों तक सीमित नहीं है। युवा वोटरों की बढ़ती तादाद, सोशल मीडिया का बदलता नैरेटिव और त्वरित फैसलों के इस युग में पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जो ऊर्जावान होने के साथ-साथ सर्वस्वीकार्य भी हो। यहीं से संगठन में बदलाव की आवश्यकता और मुखर होकर सामने आती है।
मंत्रिमंडल से संगठन की ओर: कौन है वो ‘मास्टर-कार्ड’?
किरण सिंहदेव के विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल के एक प्रमुख सदस्य का नाम सबसे आगे उछल रहा है। सियासी विश्लेषकों की मानें तो यदि यह बदलाव होता है, तो इसके पीछे ठोस वजहें हैं:
- बलरामपुर से दंतेवाड़ा तक मजबूत नेटवर्क: वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा में अगर किसी नेता का संपर्क दायरा उत्तर के बलरामपुर से लेकर दक्षिण के दंतेवाड़ा (बस्तर) तक ज़मीनी कार्यकर्ताओं के बीच सीधा और गहरा है, तो वह यही मंत्री हैं।
- दमदार और आकर्षक चेहरा (Face Value): जन-जी (Gen Z) और युवा वर्ग के बीच पैठ बनाने के लिए पार्टी को जिस ऊर्जावान और प्रभावी व्यक्तित्व की तलाश है, उस कसौटी पर यह नाम फिट बैठता है।
- संगठनात्मक अनुभव: सरकार में मंत्री रहते हुए भी कार्यकर्ताओं की सुध लेना और संगठन की नब्ज पहचानना इनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
क्या सध पाएंगे क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण?
यदि साय मंत्रिमंडल से किसी मंत्री को संगठन का मुखिया बनाया जाता है, तो पार्टी को सरकार और संगठन—दोनों मोर्चों पर री-बैलेंसिंग (Re-balancing) करनी होगी:
- कैबिनेट में जगह: यदि मंत्री को संगठन में भेजा जाता है, तो साय कैबिनेट में एक पद खाली होगा, जिसे भरने के लिए क्षेत्रीय संतुलन साधने का नया रास्ता खुलेगा।
- बस्तर बनाम मैदानी इलाका: किरण सिंहदेव बस्तर संभाग से आते हैं। नए अध्यक्ष के चयन में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा बस्तर के सियासी प्रभाव को कैसे बरकरार रखती है या मैदानी और सरगुजा क्षेत्रों को कैसे साधती है।
अंतिम पत्ता आलाकमान के हाथ
यह भाजपा की अपनी कार्यशैली है—जब तक अंतिम लिफाफा खुल न जाए, तब तक किसी भी नाम पर मुहर मानना जल्दबाजी होगी। जिस नाम पर आज सबसे ज्यादा सट्टा लग रहा है, हो सकता है केंद्रीय नेतृत्व किसी ‘सरप्राइज एलिमेंट’ को सामने लाकर खड़ा कर दे।
फिर भी, इतना तय है कि किरण सिंहदेव के स्वास्थ्य, उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और आने वाले चुनावी गणित को देखते हुए छत्तीसगढ़ भाजपा में सांगठनिक बदलाव अब ज्यादा दूर की बात नहीं लगती। देखना यह होगा कि दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ की कमान किस ‘मास्टर स्ट्राइकर’ के हाथ में आती है।