डेस्क । जिले के मुख्य स्वास्थ्य केंद्र कहे जाने वाले जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। अस्पताल में पिछले दो घंटे से अधिक समय से बिजली गुल होने के कारण पूरे परिसर और वार्डों में अंधेरा पसरा हुआ है। बिजली न होने और जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था समय पर शुरू न किए जाने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वार्डों में छाया अंधेरा, मोबाइल टॉर्च बना एकमात्र सहारा
अस्पताल के इंडोर और आउटडोर वार्डों में बिजली ठप होने से मरीजों का हाल बेहाल है। स्थिति इतनी दयनीय है कि तीमारदार और मरीज अपने मोबाइल फोन के टॉर्च की रोशनी में रात या समय गुजारने को मजबूर हैं।

- परेशानी: बिजली न होने से वार्डों में उमस और गर्मी बढ़ गई है, जिससे बीमार मरीजों की तकलीफें और अधिक बढ़ गई हैं।
- इलाज में बाधा: डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी मरीजों की जांच करने और दवाइयां देने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठ रहे गंभीर सवाल
जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में बिजली गुल होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन आपात स्थिति से निपटने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं रहता है।
- अस्पताल में पावर बैकअप या जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद समय पर उसका उपयोग न होना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
- गंभीर मरीजों की जान जोखिम में डालकर इस तरह की व्यवस्थाएं प्रशासन के दावों की पोल खोल रही हैं।
निष्कर्ष
दो घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल न होना और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की त्वरित जांच की जाए और अस्पताल में निर्बाध बिजली आपूर्ति व पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी दुर्दशा का सामना न करना पड़े।