धान खरीदी पर मंडराया संकट, पटवारियों की हड़ताल पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

​रायपुर: छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को तेज कर दिया है। इस हड़ताल को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीसीसी अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पटवारियों के काम पर न होने से आगामी धान खरीदी और किसानों से जुड़ी प्रक्रियाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी।

​किसानों के हितों पर पड़ेगा सीधा असर

​धनेन्द्र साहू ने राज्य सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि पटवारियों की हड़ताल का सबसे बड़ा खामियाजा प्रदेश के किसानों को भुगतना पड़ेगा।

  • ​धान खरीदी पर संकट: आगामी 15 नवंबर से राज्य में धान खरीदी की शुरुआत होनी है। पटवारियों के हड़ताल पर रहने से किसान अपना पंजीयन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर कैसे पूरी कर पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
  • ​गिरदावरी का कार्य बाधित: हड़ताल के कारण फसल के रकबे और स्थिति का आकलन करने वाला गिरदावरी का काम पूरी तरह से ठप है। गिरदावरी रिपोर्ट समय पर न मिलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • ​सरकार पर साजिश का आरोप: पूर्व पीसीसी अध्यक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार पंजीयन और अन्य जटिल प्रक्रियाओं के जरिए किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार की सोची-समझी साजिश है, ताकि प्रदेश में सुचारू रूप से धान खरीदी न हो सके।

​कर्मचारियों पर तकनीकी बोझ और संसाधनों की कमी

पटवारियों की मांगों का समर्थन करते हुए धनेन्द्र साहू ने कहा कि केवल कागजी और तकनीकी दावों के नाम पर कर्मचारियों पर अत्यधिक काम का बोझ डाला जा रहा है। मैदानी स्तर पर न तो पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध है और न ही आवश्यक संसाधन, जिससे कर्मचारियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द पटवारियों की समस्याओं का समाधान निकाले और उनकी हड़ताल को कांग्रेस का नैतिक समर्थन दिया है।

​राजस्व मंत्री के बयान पर पलटवार

​इस पूरे घटनाक्रम के बीच, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के उस बयान पर भी सियासी घमासान मच गया है जिसमें उन्होंने पटवारियों की हड़ताल की जानकारी न होने की बात कही थी।

​धनेन्द्र साहू ने इस पर पलटवार करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इतने बड़े स्तर पर कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और सरकार के जिम्मेदार मंत्री को इसकी भनक तक नहीं है। जबकि पटवारियों द्वारा हड़ताल पर जाने से पहले विधिवत नोटिस भी दिया गया था। मंत्री का यह बयान शासन व्यवस्था की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

​निष्कर्ष:

एक तरफ जहां पटवारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ धान खरीदी की नजदीक आती तारीख के बीच किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। देखना यह होगा कि सरकार इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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