जगदलपुर। बस्तर जिले में सामुदायिक सहभागिता, सुपोषण और प्रारंभिक बाल विकास को सशक्त करने के उद्देश्य से आयोजित ‘अंगना मिलन’ कार्यक्रम एक विशाल जन-उत्सव के रूप में संपन्न हुआ। जिले भर के 1,670 आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित इस महाभियान में 58,000 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई, जिसने इस पहल को एक ऐतिहासिक सफलता में बदल दिया।

सुपोषण और स्वास्थ्य पर केंद्रित गतिविधियां
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चों का सर्वांगीण विकास और सुपोषण रहा:
- स्वास्थ्य एवं पोषण परीक्षण: केंद्रों पर बच्चों का वजन और ऊंचाई मापकर उनके स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया गया।
- पोषण प्रदर्शनी: ‘तिरंगा थाली’ और स्थानीय पौष्टिक आहार पर आधारित विविध व्यंजन प्रदर्शित कर माताओं को संतुलित खान-पान की जानकारी दी गई।
- बाल-सुलभ खेल व कार्यशालाएं: बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए खिलौना कार्यशालाओं और रोचक खेल गतिविधियों का आयोजन हुआ, जिसमें 32,257 बच्चों ने उमंग के साथ भाग लिया।
‘अंगना चौपाल’: अभिभावकों के बीच जागरूकता का अलख
माताओं और पालकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष परामर्श सत्र और ‘अंगना चौपाल’ का आयोजन किया गया:
- महिला सहभागिता: 32,009 महिलाओं ने शिशु देखभाल, टीकाकरण और स्वच्छता जैसे विषयों पर सीधी चर्चा में हिस्सा लिया।
- पुरुषों की भागीदारी: बाल विकास में पितृत्व की भूमिका को रेखांकित करते हुए 13,842 पुरुषों ने भी संवाद सत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ज़मीनी योद्धाओं का सम्मान
इस भव्य आयोजन का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब समाज के अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने वाली 8,918 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों को उनकी निष्ठा और निस्वार्थ सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
‘अंगना मिलन’ के इस सफल समन्वय ने न केवल बस्तर के आंगनबाड़ी केंद्रों में पारिवारिक आत्मीयता का संचार किया है, बल्कि जिले में सुपोषण और बाल विकास के एक नए युग का सूत्रपात भी किया है।

