शिक्षा के मंदिर में ‘नशे का पाठ’: वेतन न मिलने की आड़ में गुरुजी का हंगामा, सिस्टम और शिक्षक दोनों पर उठे गंभीर सवाल

डेस्क । शिक्षा के मंदिर को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। कोटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय हाई स्कूल बहेरामुड़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में स्कूल के प्रधान पाठक (हेडमास्टर) शराब के नशे में धुत होकर बच्चों और कर्मचारियों के सामने हंगामा करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने न केवल शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

​नशे में धुत हेडमास्टर का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्रधान पाठक नशे की हालत में स्कूल पहुंचे और वहां मौजूद बच्चों व स्टाफ के सामने हंगामा करने लगे। जब वहां मौजूद लोगों ने उनके इस आचरण पर आपत्ति जताई और सवाल पूछे, तो वे अपनी गलती मानने के बजाय उलटे तर्क देने लगे।

​शिक्षक का दावा है कि उन्हें पिछले 10 महीनों से वेतन (सैलरी) नहीं मिला है। इसी नाराजगी का हवाला देते हुए उन्होंने बेबाकी से कहा, “ज्यादा से ज्यादा विभाग मुझे टर्मिनेट (सेवामुक्त) ही तो कर देगा।”

​प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी का आरोप

​मामला सिर्फ शराब पीकर स्कूल आने और हंगामा करने तक ही सीमित नहीं रहा। सूत्रों और वायरल वीडियो के दावों के अनुसार, बहस के दौरान प्रधान पाठक ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी अभद्र व अमर्यादित टिप्पणियां कीं। बच्चों के सामने एक जिम्मेदार शिक्षक द्वारा इस तरह की भाषा और व्यवहार को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

​बड़ा सवाल: वेतन नहीं मिला तो क्या शराब पीकर स्कूल आएंगे गुरुजी?

​इसमें कोई दो राय नहीं है कि किसी कर्मचारी को 10 महीने तक वेतन न मिलना एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है और यह आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना के समान है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि:

  • ​क्या वेतन न मिलने का विरोध जताने का तरीका स्कूल में शराब पीकर हंगामा करना है?
  • ​क्या मासूम बच्चों के सामने ऐसा आचरण करके उन्हें ‘नशे का पाठ’ पढ़ाना तर्कसंगत ठहराया जा सकता है?

​शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है। यदि व्यवस्था से कोई शिकायत थी, तो उसके लिए प्रशासनिक, कानूनी या सांकेतिक विरोध के कई रास्ते मौजूद थे। कक्षा में नशे की हालत में पहुंचना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

​शिक्षक दोषी या सिस्टम की भी होगी जांच?

​बहेरामुड़ा स्कूल का यह वीडियो वायरल होने के बाद बिलासपुर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने दो अलग-अलग पहलुओं को जन्म दिया है:

  1. ​शिक्षक की जवाबदेही: स्कूल के अनुशासन, बच्चों के भविष्य और पद की गरिमा को ताक पर रखने के लिए प्रधान पाठक पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई (निलंबन/बर्खास्तगी) होनी तय मानी जा रही है।
  2. ​प्रशासनिक लापरवाही की जांच: क्या वाकई शिक्षक को 10 महीने से वेतन नहीं मिला था? यदि हां, तो इसके लिए जिम्मेदार ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) या संबंधित लिपिकों पर क्या कार्रवाई होगी? किसी कर्मचारी को इतने लंबे समय तक बिना वेतन के काम कराने वाले सिस्टम के दोषियों पर भी गाज गिरनी चाहिए।

​निष्कर्ष

​शिक्षा के मंदिर में हुआ यह वाकया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ जहां शिक्षक का गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित आचरण पूरी तरह अक्षम्य है, वहीं दूसरी तरफ 10 महीने तक वेतन रोके रखने वाली प्रशासनिक व्यवस्था भी कटघरे में है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग केवल शिक्षक को बलि का बकरा बनाकर मामले को दबाता है या उस बदहाल सिस्टम की भी सफाई करता है जिसकी वजह से ऐसी नौबत आई।

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