डेस्क । इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना सरकार की प्राथमिकता में है, लेकिन सात साल बाद भी परियोजना का महज 60 फीसदी सर्वे ही हो पाया है। सर्वे पर अब तक करीब 12 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। सर्वे में देरी को लेकर सरकार ने केंद्रीय एजेंसी वाप्कोस (WAPCOS) से जानकारी मांगी है।

परियोजना की स्थिति और पृष्ठभूमि
- पिछली सरकार की पहल: इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को पिछली भूपेश सरकार ने प्राथमिकता सूची में रखा था और केंद्र सरकार की एजेंसी वाप्कोस को सर्वे का जिम्मा सौंपा था।
- सर्वे की शुरुआत: वर्ष 2019 में वाप्कोस ने सर्वे शुरू किया और मार्च 2021 में प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी।
- इतिहास व विरोध: करीब 45 साल पुरानी प्रस्तावित बोधघाट परियोजना की प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट आने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया था।
वर्तमान स्थिति व प्रशासनिक कदम
- सरकार का रुख: सरकार बदलने के बाद परियोजना पर काम आगे बढ़ा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जल संसाधन विभाग का प्रभार संभाल रहे हैं। साय सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर के विकास के लिए परियोजना को जरूरी मानते हुए बोधघाट को अपने हाथों में लिया है।
- धीमी रफ्तार पर पूछताछ: वाप्कोस ने सर्वे का काम आगे बढ़ाया है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी महज 60 फीसदी सर्वे ही हो पाया है और एजेंसी से सर्वे में देरी को लेकर पूछताछ की जा रही है।
- केंद्रीय एजेंसी पर 12 करोड़ खर्च हो चुके: सर्वे एजेंसी को अब तक करीब 12 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
परियोजना का विवरण और प्रभाव - स्थान
दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड के ग्राम बारसूर से 8 किमी और जगदलपुर से करीब 100 किमी की दूरी पर प्रस्तावित।
जल का उपयोग
प्रारंभिक सर्वे में बोधघाट से 155.911 टीएमसी जल के उपयोग का प्रस्ताव है। (गोदावरी जल विवाद अधिकरण ने छत्तीसगढ़ को 300 टीएमसी जल आवंटित किया है, जिसमें से राज्य अभी सिर्फ 13.023 टीएमसी का उपयोग कर रहा है)।
कुल डूब क्षेत्र
13,783 हेक्टेयर भूमि
भूमि का विभाजन
5,704 हेक्टेयर वनभूमि, 5,010 हेक्टेयर निजी भूमि और 3,068 हेक्टेयर सरकारी भूमि।
प्रभावित गांव
कुल 42 गांव (28 गांव पूर्ण और 14 गांव आंशिक रूप से डूबेंगे)।
विस्थापन
2,448 परिवारों के करीब 12,600 लोग प्रभावित/विस्थापित होंगे। - पोलावरम परियोजना से तुलना
आंध्र प्रदेश की पोलावरम परियोजना से जहाँ 288 गांव प्रभावित हैं, वहीं बोधघाट परियोजना से सिर्फ 42 गांव ही प्रभावित होंगे।