जगदलपुर । 600 सालो से अधिक समय से बस्तर में दशहरे की रस्म पूरे विधे विधान से पूरी की जा रही है और आज हरेली अमावस्या के दिन पाट जात्रा के रस्म के साथ 75 दिनों तक मनाये जाने वाली विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का आगाज हो गया है हालांकि आज रस्मो के अनुसार होने वाली बकरी की बली को रोक दिया गया …..मौजूद पुजारी माझी चालाकियों के अनुसार रस्मो में कभी भी खंडित बकरे की बाली नही दी जाती है और जो बकरा प्रशासन द्वारा लाया गया है वो खंडित है ऐसे में इस बकरे को बाली के रूप में नही लिया जा सकता…..
बकरे की बली रोकने के बाद विवाद की स्थिति बनते देख प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों द्वारा दूसरा बकरा लाने की बात कही गई हालांकि दूसरा बकरा लाने के बाद भी मौजूद पुजारी मांझी चालकी सहित ग्रामीणों का नाराजगी दूर नही हुई…