सुकमा I नवसल प्रभावित इलाकों में सड़क, पूल और अन्य निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं, लेकिन शिक्षा अब भी सबसे पीछे दिखार्ड दे रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सुकमा जिले का तुमलापाड़ गांव है ….. करीब 50 घरों की आबादी वाले इस गांव में आज तक न प्राथमिक स्कूल खुल पाया है, न ही आंगनबाडी केंद। गांव के 20 से अधिक बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित हैं। दूसरी ओर प्रशासन जिले में 22 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार कर चुका है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन गांवों में बच्चे वर्षों से स्कल का इंतजार कर रहे हैं, क्या उन्हें इस प्रस्ताव में जगह मिलेगी। तमलापाड के ग्रामीण बताते हैं कि पहले नक्सल प्रभाव के कारण गांव तक पहुचना मुश्किल था। अब पहाड़ काटकर सडक बना दी गई है। आवागमन आसान हो गया है। इसके बावजद शिक्षा विभाग की ओर से गांव में स्कूल शुरू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हईं। बच्चों को पढ़ाई ‘के लिए कई किलोमीटर दर जाना’ पड़ता है। इसलिए अधिकांश बच्चे स्कल नहीं जा पाते….
गांव में छह से बारह वर्षं तक के 20 से अधिक बच्चे हैं कई बच्चों का नामांकन नहीं हो पाया। कई बच्चों ने दूरी और संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ दी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में प्राथमिक स्कूल खुल जाए तो सभी बच्चे नियमित रूप से शिक्षां से जुड़ सेकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान अधिकारी और ठकदार कई बार गांव पहंचे, लेकिन शिक्षा, और आंगनबाडी की जरूरत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
नक्सलवाद तो खत्म हुआ पर स्कूल अभी भी नही पहुचा…20 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित