रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी कंपनियों के एकाउंटेंट को अपना निशाना बनाते थे और व्हाट्सएप पर फर्जी पहचान (डिस्प्ले पिक्चर और नाम का दुरुपयोग) सेट कर करोड़ों की चपत लगाते थे। पुलिस ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से इस गैंग के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही, त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 38 लाख रुपये की राशि विभिन्न बैंक खातों में होल्ड करवा दी गई है।

ठगी का तरीका (Modus Operandi)
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि दोनों ही मामलों में ठगों ने एक ही जैसा पैंतरा अपनाया। आरोपियों ने कंपनियों के उच्च अधिकारियों या निर्देशकों के नाम और फोटो का उपयोग कर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाए। इसके बाद वे कंपनियों के एकाउंटेंट से संपर्क कर विश्वास में लेते थे और अलग-अलग बहानों से अपने खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते थे।
किन मामलों में हुई ठगी?
- थाना टिकरापारा प्रकरण: इस मामले में आरोपियों ने 93 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया था।
- थाना तेलीबांधा प्रकरण: इस हाई-प्रोफाइल मामले में कंपनियों से 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ठगी गई थी।
पुलिस की पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि टिकरापारा प्रकरण में गिरफ्तार किए गए आरोपी थाना तेलीबांधा के 2 करोड़ रुपये की ठगी में भी शामिल थे।
कहां से और कौन-कौन गिरफ्तार?
पुलिस की साइबर सेल और संबंधित थानों की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर राज्यों में दबिश दी:
- महाराष्ट्र (ठाणे – उल्हासनगर): 3 आरोपी गिरफ्तार।
- उत्तर प्रदेश (प्रयागराज): 2 आरोपी गिरफ्तार।
बरामदगी और जब्ती
पुलिस ने आरोपियों के पास से आपत्तिजनक सामग्रियां और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं:
- टिकरापारा प्रकरण में: 25 हजार रुपये नगद, 6 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड और 3 पासबुक।
- तेलीबांधा प्रकरण में: 2 मोबाइल फोन।
बड़ी राहत: 1.38 करोड़ रुपये होल्ड
साइबर सेल की तत्परता से ठगी गई पूरी रकम में से एक बड़ा हिस्सा बचाया गया है। पुलिस ने अलग-अलग बैंक खातों की छानबीन कर:
- टिकरापारा प्रकरण से 24 लाख रुपये और,
- तेलीबांधा प्रकरण से 1 करोड़ 14 लाख रुपये, —कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपये की राशि को विभिन्न बैंक खातों में सफलताપૂર્વક होल्ड करा दिया है।
रायपुर पुलिस इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और बैंक खातों के जरिए जुड़े नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस प्रकार के साइबर अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।