​राष्ट्रीय एकता दिवस: केवड़िया में बस्तर के जवानों के शौर्य का डंका, सांसद महेश कश्यप ने बताया गौरव का क्षण

डेस्क । राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गुजरात के केवड़िया में आयोजित भव्य राष्ट्रीय परेड में इस वर्ष बस्तर के वीरों का पराक्रम देश के सामने मिसाल बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस परेड में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और विशेष कार्य बल (STF) के जवानों ने अपने अदम्य साहस और शौर्य का प्रदर्शन किया।

​कभी लाल आतंक और नक्सलवाद की गंभीर चुनौतियों से जूझने वाले बस्तर के जवानों का देश के इस सर्वोच्च मंच पर कदमताल करना, क्षेत्र में बदलते हालात और सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक कामयाबी का जीवंत प्रतीक है।

​बलिदानी जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि: सांसद महेश कश्यप

​बस्तर के जवानों की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बस्तर सांसद महेश कश्यप ने इसे पूरे अंचल के लिए एक गौरव का क्षण करार दिया।

​”यह क्षण उन सभी बलिदानी जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आतंकवाद, नक्सलवाद और अलगाववाद जैसी देश विरोधी ताकतों के खिलाफ हमारे जवानों के अटूट संघर्ष ने आज पूरे देश में एकता, अखंडता और सुरक्षा का एक मजबूत संदेश दिया है।”

— महेश कश्यप, सांसद (बस्तर)

​शांति बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: IG बद्रीनारायण मीणा

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) बद्रीनारायण मीणा ने भी इस आयोजन को बस्तर के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि जवानों की दिन-रात की मेहनत और बस्तर की जनता के निरंतर सहयोग से ही आज क्षेत्र में शांति और विश्वास का माहौल बन पाया है।

​सुरक्षा बलों के आगामी संकल्प और प्राथमिकताएँ:

  • ​स्थायी शांति का निर्माण: कायम हुई शांति को बनाए रखना पुलिस और सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
  • ​जनसमस्याओं का त्वरित समाधान: आम नागरिकों की समस्याओं का समय पर निस्तारण करना और उन्हें आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
  • ​सुरक्षा का मजबूत वातावरण: बस्तर के सुदूर क्षेत्रों तक विकास और सुरक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना।

​देश की एकता और अखंडता का संकल्प

​राष्ट्रीय एकता दिवस के इस खास मौके पर पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को हर कीमत पर अक्षुण्ण रखने का दृढ संकल्प लिया। केवड़िया के मंच से बस्तर के जवानों की यह गर्जना न सिर्फ क्षेत्र में लौटती शांति की तस्दीक करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि बस्तर अब विकास और सुरक्षा की नई इबारत लिख रहा है।

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